खराब फायर फाइटिंग सिस्टम से हुई आगजनी
प्रबंधन आैर अधिकारियों की कमी पर भी सवाल
कुलदीपसिंह खरवाड़ा ने आरोप लगाया कि आगजनी की घटना के लिए बोर्ड के प्रबंधन ने पॉवर हाउस में 80 फीसदी मैकेनिकल स्टाफ है। मेंटीनेस में मैकेनिकल की जगह इलेक्ट्रिकल एक्सईयन को लगाया गया है। इसी तरह अधिकतर पॉवर हाउस में शिफ्ट इंजीनियरों की कमी है। कई शिफ्ट इंजीनियर को पॉवर हाउस की जानकारी भी नहीं है, इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की ताकि भविष्य में व्यवस्था को बेहतर तरीके से सुधारा जा सके।
शिमला |111 मेगावाटके संजय पॉवर प्रोजेक्ट में आगजनी की घटना पर कर्मचारी यूनियन ने ही सवाल उठाए हैं। यूनियन ने फायर फाइडिंग सिस्टम पर हो रहे अधिक खर्च के साथ प्रोजेक्टों में आए दिन विद्युत उत्पादन बाधित होने पर प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि भावा प्रोजेक्ट में आगजनी से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए की लागत से लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम की खराबी यह घटना घटी। बाढ़ के कारण पाइप का टुकड़ा बह गया था, जिससे पानी की सप्लाई को पॉवर हाउस तक नहीं पहुंचाया जा सका। आग पर काबू पाने के लिए सिलेंडरों में गैस भरने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। जिस ट्रांसफार्मर में आग लगी, वह 18 साल से बेकार पड़ा था। प्रोजेक्ट में लगे ट्रांसफार्मर को ठीक करने के लिए भारी राशि खर्च हुई, लेकिन इसके बावजूद तकनीकी खराबी को दुरुस्त नहीं किया जा सका। उन्होंने इस सिस्टम के खराब होने को ही हादसे का मुख्य कारण बताया।