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िनर्माण में 5 साल की देरी, करोड़ों का चूना

6 वर्ष पहले
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111 मेगावॉट क्षमता का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।

85%काम कंपनी तय समय पर कर पाई थी।

2011 टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य था।

2007 में परियोजना की टनल का काम शुरू।

डैम, प्रोजेक्ट टनल का कार्य अलग अलग हो रहा है

परियोजनानिर्माण के लिए अलग अलग टेंडर किए गए थे। डैम, पावर हाउस कंस्ट्रक्शन का कार्य अलग अलग हो रहा है। यह सभी कार्य पूरे हो चुके हैं। टनल निर्माण का कार्य लटका हुआ है। यह कार्य पूरा होने के बाद परियोजना औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

पब्बर नदी पर बन रहा है प्रोजेक्ट

सावड़ाकुड्डू जल विद्युत परियोजना का निर्माण पब्बर नदी पर हो रहा है। 111 मेगावाट क्षमता यह प्रोजेक्ट है। सावड़ा कुडडू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की कीमत जून 2009 में 1181.90 करोड़ रुपए आंकी गई थी।

पब्बर नदी में बनने वाले 111 मेगावॉट क्षमता वाले सावड़ा कुडडू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की कीमत जून 2009 में 1181.90 करोड़ रुपए आंकी गई थी। प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य वर्ष 2011 में पूरा किया जाना था। प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में शुरू किया गया था और इसे पुरा करने के लिए चार वर्षाें का समय निर्धारित किया गया था। लेकिन टनल का काम कर रही कंपनी की ओर से बरती गई अनियमितताओं के चलते प्रोजेक्ट के पूरे होने में पांच वर्ष की देरी हो गई है।

दूसरी कंपनी को एडवांस में 4 करोड़

पावरकॉर्पोरेशन ने 3 नवंबर 2014 को नए सिरे से इस का टेंडर हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। मुंबई बेस्ड इस कंपनी को निमार्ण कार्य शुरू करने से पूर्व 4,9975000 की कार्य शुरू करने के लिए एडवांस पेमेंट की गई है।

179 करोड़ में दिया यह कार्य

{कंपनीको अंडर ग्राउंड एक्सकेवेशन 1643 मीटर

{कांक्रीट लाइनिंग 9057 मीटर

{कांक्रीटिंग इनवर्ट 10691 मीटर

{स्टील लाइनर 530 मीटर

{1 नंबर गेट

करार रद्द करने से पहले 52 करोड़ की पेमेंट

टनलनिर्माण का कार्य कर रही कंपनी के साथ करार रद्द करने से पहले 52 करोड़ की पेमेंट कर दी थी। सवाल यह उठता है कि कॉरपोरेशन को जब पता था कि कंपनी कार्य अनुबंध की शर्तों के अनुसार नहीं कर रही है तो पहले करार रद्द क्यों नहीं किया गया। इतनी पेमेंट क्यों पहले ही कर दी गई।

पावर कॉर्पोरेशन ने अक्टूबर 2007 में सावड़ा कुड्डू परियोजना के लिए टनल निर्माण के लिए टेंडर निकाला। मै. केसी ज्वाइंट वेंचर को 115,91,61,063.00 में यह कार्य दिया गया। कंपनी ने समय पर कार्य नहीं किया। नियमों के तहत करार को खत्म कर दूसरी कंपनी को टेंडर दिया गया। खुदाई का कार्य 85 फीसदी पूरा होने के बाद यह टेंडर 179 करोड़ में दिया गया। पहले कार्य कर रही कंपनी 9548 मीटर की खुदाई कर चुकी थी। हालांकि निगम ने नए सिरे से किए टेंडर में कई काम जोड़े हैं, बावजूद इसके बढ़ी हुई लागत से किया टेंडर गले नहीं उतर रहा है।

अनिल ठाकुर/रोहित पराशर| शिमला

111मेगावॉट क्षमता की सावड़ा कुड्डू जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य समय पर पूरा होने से राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। परियोजना से हिमाचल को बिजली मिलना तो दूर, देरी की वजह से इस की कॉस्ट 50 फीसदी बढ़ गई है। वर्ष 2007 में परियोजना की टनल का काम शुरू हुआ। पूर्व निर्धारित लक्ष्य के तहत परियोजना की टनल का निर्माण 2011 तक पूरा होना था। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 10 अक्टूबर 2007 में टनल निर्माण के लिए टेंडर निकाला। टनल निर्माण की लागत 154.60 करोड़ तय की गई। चेन्नई की कंपनी मै. केसी ज्वाइंट वेंचर को 115,91,61,063.00 में टेंडर आवंटित किया। कंपनी ने पावर कॉरपोरेशन की आेर से टनल निर्माण की तय लागत राशि से भी कम पर काम लिया। निर्माण कार्य में देरी के बाद निगम ने कंपनी के साथ करार को रद्द कर दिया। नए सिरे से इसका टेंडर दूसरी कंपनी को दिया गया। हालांकि निर्माण कार्य को लेकर पहले के कर्मचारियों के साथ विवाद अभी तक चल रहा है। इस कारण दूसरी कंपनी निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकी है।