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ऑन डिमांड पर हर स्कूल को बस मुहैया करवाएगी सरकार

6 वर्ष पहले
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हिमाचलके हर निजी स्कूल को छात्रों के लिए राज्य सरकार ने बसें मुहैया करवाने का फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में बच्चों को लाने आैर छोड़ने के लिए हो रही टैक्सी के इस्तेमाल से छुटकारा मिलेगा। इसको लेकर सरकार की आेर से परिवहन मंत्रालय सभी स्कूलों को पत्र भेज रहे हैं। इससे टैक्सी वालों की मनमानी पर रोक लगेगी।

राजधानी शिमला सहित प्रदेश के सभी शहरों में वर्तमान में निजी स्कूलों में बच्चों की ट्रांसपोर्टेशन के लिए टैक्सियों का इस्तेमाल किया जाता है। शिमला में सबसे ज्यादा लोग इस रोजगार से जुड़े हैं। इसी तरह सोलन, धर्मशाला, पालमपुर, मंडी सहित अन्य सभी शहरों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। इसे खत्म करने के लिए प्रदेश सरकार ने इस पर काम शुरू किया है। स्कूल प्रबंधन को राज्य परिवहन निगम को बस की डिमांड भेजनी होगी। इस डिमांड के आधार पर परिवहन निगम की आेर से जेएनएनयूआरएम की अतिरिक्त बसें मिल सकंेगी। राज्य में केंद्र की योजना के तहत मिली बसों के बाद इनकी संख्या काफी बढ़ गई है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सभी निजी स्कूलों को बसें मुहैया करवाने का फैसला लिया है।

राज्य का कोई भी सरकारी या निजी स्कूल इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। इन विशेष बसों में सरकारी स्कूल के बच्चों को निशुल्क यात्रा सुविधा नहीं मिलेगी। हालांकि अन्य सभी सामान्य बसों

में यह निशुल्क परिवहन सुविधा मिलती रहेगी।

परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि स्कूल प्रबंधन को पत्र भेजे गए हैं। इसमें मांग पर बस सेवा उपलब्ध करवाने की बात कहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी भाग से आने वाली ऐसी मांग को पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे टैक्सियों के कारण लगने वाले अनावश्यक जाम से छुटकारा मिल सकेगा और बच्चों को इससे लाभ मिलेगा।

स्कूलों को उपलब्ध करवाए जाने वाली इन बसों में रियायती पासों की सुविधा नहीं होगी, लेकिन लग्जरी बसों में साधारण किराए पर बच्चों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि स्कूलों के लिए बनने वाले पास की सुविधा आगे भी जारी रहेगी।

राज्य में निजी स्कूलों में टैक्सी के माध्यम से सेवाएं दे रहे ट्रांसपोटरों पर राज्य सरकार ने नकेल कसने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। आगामी सत्र से सभी बड़े निजी स्कूलों में टैक्सियों की बजाय राज्य सरकार ने बसों को चलाने का फैसला लिया है। इससे शहरों में ट्रेफिक को नियंत्रित करने में भी सफलता मिलने की उम्मीद है।