काम से ज्यादा क्यों किया गया भुगतान
111मेगावाट विद्युत क्षमता के सावड़ा कुड्डू परियोजना के टनल निर्माण में देरी से पावर कॉर्पोरेशन निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में गई है। निर्माण कार्य में देरी से कई तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह कि परियोजना की मॉनिटरिंग कर रहे अधिकारियों को जब पता था कि कार्य धीमी गति से हो रहा है तो कंपनी को पहले क्यों नहीं चेताया। कंपनी की पेमेंट को पहले क्यों नहीं रोका गया। प्राइस एसकेलेशन के 111041679 करोड़ रुपए के अलावा 522955640 करोड़ रुपए की रकम जारी कर दी गई। नियमों के तहत कार्य का पैसा तब दिया जाता है जब उस हिसाब से कार्य पूरा किया गया है। पावर कॉर्पोरेशन कंपनी की पेमेंट करता रहा। लेकिन कंपनी करार के तहत कार्य नहीं करती रही। वर्ष 2007 में कंपनी को दिए कार्य की शर्तों के अनुसार टर्म एंड कंडिशन क्लियर की गई थी। शर्तों के तहत यदि कंपनी कार्य नियमों के अनुसार नहीं करती तो करार खत्म कर बैंक गारंटी को जब्त कर दी जाएगी।
प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान निर्माणाधीन कंपनी को काम के मुताबिक पैसे का भुगतान किया जाता है। अधिकारियों की मिली भगत से कंपनी को समय के बाद पैसे का भुगतान तो हुआ, लेकिन काम कितना हुआ है, इसे जांचने की किसी ने जहमत नहीं उठाई। अब इस मामले में जिन अधिकारियों की डयूटी काम के आकलन की थी, क्या उन्हें पावर कॉर्पोरेशन की आेर से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा।
केसी ज्वाइंट वेंचर कंपनी की ओर से किए जा रहे टनल के निर्माण कार्य में यदि एचपी पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी सही मानिटरिंग करते तो यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा किया जा सकता था। जिससे आर्थिक हानि से भी बचा जा सकता था और समय पर प्रोजेक्ट भी तैयार होना था।
देरी का यह रहा कारण
टनलके निर्माण कार्य के दौरान टनल के अंदर की जमीन की जुलॉजीकल कंडिशन भी खराब होने की वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई। टनल के अंदर हार्ड रॉक आने से इसकी प्रोजेक्ट कॉस्ट में भी बढ़ोतरी हुई। एक तो पहले ही कंपनी ने ठेका लेने के लिए टेंडर में कम राशि अंकित की थी और टनल के अंदर की जूलॉजिकल कंडिशन खराब होने से इसके निर्माण कार्य में अतिरिक्त बढ़ोतरी के साथ निर्माण के समय में भी देरी हो रही थी। जिसके चलते कंपनी ने निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया।
शुरू से ही विवादों में प्रोजेक्ट
सावड़ाकुड्डू प्रोजेक्ट निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही विवादों में रहा है। निर्माण कार्य शुरू हाेने के कुछ समय बाद प्रोजेक्ट स्थल पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को डराने के लिए हवा में गोलियां चलाई गई थी। इसके अलावा प्रोजेक्ट स्थल में कर्मचारियों और कंपनी के अधिकारियों के बीच में कई बार गतिरोध हुआ जिसके चलते भी इसके निर्माण कार्य में देरी होती रही। साथ ही फर्जी हाजरियों को लेकर भी यहां पर बडा़ घाेटाला सामने आया था।
{निर्माण लागत बढ़ने के मामले में नप सकते हैं कई अधिकारी
{मानिटरिंग सही होने पर भी उठते रहे हैं सवाल