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एसएफआई, एबीवीपी का रूसा फीस वृद्धि पर आंदोलन आज से

6 वर्ष पहले
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शहरके कॉलेज खुलते ही छात्र राजनीति भी गरमा गई है। छात्र संगठन एबीवीपी और एसएफआई फीस वृद्धि और रूसा सिस्टम के खिलाफ शुक्रवार से अपने आंदाेलन का आगाज करेंगे। कॉलेज कैंपस में दोनों संगठनों के कार्यकर्ता विवि प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करेंगे। एसएफआई जहां आम सभाएं करेगी, वहीं एबीवीपी कॉलेज कैंपस में प्रदर्शन करेगी। एसएफआई के जिला सचिव प्रेम कायथ का कहना है कि वह 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाएंगे, इसके बाद 16 फरवरी को पूरे जिला में चंदा अभियान चलाएंगे। 20 फरवरी को कॉलेजों में धरना प्रदर्शन किए जाएंगे। 25 से 27 फरवरी को दिल्ली में होने वाली रैली में प्रदेश भर से 500 से अधिक कार्यकर्ता जाएंगे। वहीं, 28 फरवरी से पर्चा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

एससीए चुनाव को बंद करने को लेकर एबीवीपी सरकार अौर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। शहर के कॉलेजों में यह प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 21 फरवरी के बाद एचपीयू कैंपस में भी प्रदर्शन होंगे। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से जो वादा उन्हें सुविधाएं देने का किया गया है, वह पूरा नहीं किया जा रहा है। ऐसे मेें वह आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। एबीवीपी के जिला संयोजक संदीप शर्मा का कहना है कि रूसा सिस्टम के लागू करने से जहां छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ रहा है, वहीं लोकतांत्रिक अधिकारों को भी छीना गया है। फीस वृद्धि पर जो हाई पावर कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी है, सरकार उसे सार्वजनिक नहीं कर रही है। छात्रों से भारी भरकम फीस वसूली जा रही है।

कई काॅलेजों के पास भवन ही नहीं

एबीवीपीऔर एसएफआई का आरोप है कि प्रदेश में ऐसे 30 महाविद्यालय हैं, जिनके पास अपना भवन तक नहीं है और वह 2 से 3 कमरों में चल रहे हैं। कालेजों में शिक्षकों की कमी भी बनी हुई है, ऐसे में रूसा के लागू किए जाने की वजह से छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्र संगठनों की मांग है कि च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को पारदर्शी और तर्कसंगत बनाया जाए। क्योंकि सेमेस्टर सिस्टम के तहत छात्रों के रिजल्ट समय पर घोषित नहीं हो पा रहे हैं जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। कालेजों में रिक्त पदों की संख्या को देखते हुए नई शिक्षा प्रणाली कैसे सही तरीके से लागू हो पाएगी।