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एक कंपनी के मीटरों की स्क्रीन हो रही वॉस

6 वर्ष पहले
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तीन कंपनियों के मीटर हो रहे खराब: खरवाड़ा

राज्यविद्युत बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप चंद खरवाड़ा का कहना है कि कुछ कंपनियों के मीटरों की स्क्रीन डेड हो रही है। इनमें मुख्य रूप से मोंटल कंपनी है। दो अन्य कंपनियां भी इसी तर्ज पर पकड़ी गई हैं। इसकी सारी शिकायत उच्चाधिकारियों को की गई है। बार-बार रिप्लेस करने के लिए स्टाफ को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जबकि कर्मचारियों की वैसे ही बड़े स्तर पर कमी है। संबंधित कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर इनके खिलाफ बोर्ड प्रबंधन को कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

नहीं हो पा रही उस स्तर पर रिप्लेसमेंट

समस्यायह है कि मीटर रीडिंग में लगे निजी कंपनी के कर्ताधर्ता भी इन डेड हो रहे मीटरों को बदलने की सिफारिश कर चुके हैं। मगर समस्या यह है कि रिपलेशमेंट उस स्तर पर नहीं हो पा रही है जिस पर ये खराब हुए हैं। दरअसल में पहले से डेड मीटरों को बदलने का सिलसिला तो रूटीन में चल रहा है और जो नए मीटर भी रहे हैं वे संबंधित कंपनी के मीटरों को बदलने के लिए उपयोग में बराबर नहीं लिए जा रहे। इससे बोर्ड को हर माह चपत लग रही है।

मीटरों में तकनीकी खामी 50 फीसदी से ज्यादा

बोर्डने यह सप्लाई जिस बड़े स्तर पर संबंधित कंपनी से ली थी उसमें केवल 5 फीसदी खराब मीटरों की रिपलेशमेंट करने का एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन यह तकनीकी खामी 50 फीसदी से ऊपर तक जा पहुंची है। लगता है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ बोर्ड मैनेजमेंट ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इससे उपभोक्ताओं को अंधेरे में ही रातें गुजारनी पड़ रही हैं, वहीं इस ठंड में उनकी रातें कैसे गुजरती होंगी, इसका अंदाजा आज खुद लगा सकते हैं।

^जहां-जहां ये खराब हैं उसकी डिटेल मांगी गई है। संबंधित कंपनी को पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। कुछ डिवीजनों से 5 फीसदी से ज्यादा मीटर खराब होने की शिकायतें आई हैं। संबंधित कंपनी से एग्रीमेंट के मुताबिक 5 फीसदी अतिरिक्त सप्लाई ली गई है। जेटीकाल्टा, डायरेक्टर ऑपरेशन राज्य विद्युत बोर्ड, शिमला

50 मीटर हर माह हो रहे खराब

^लगभग50 मीटर खराब हर माह आने की शिकायत रही है। कुछ को रिपलेश भी किया जा रहा है। रिपोर्ट शिमला ऑफिस भेज दी गई है। डैड होने के कारण मीटर रीडिंग असल में नहीं होने से बोर्ड को नुकसान तो हो ही रहा है क्योंकि मौसम भी ज्यादा खपत है। बलदेवचंद, एसडीओ विद्युत सब डिवीजन-2, हमीरपुर

विक्रम ढटवालिया|हमीरपुर

बिजलीबोर्ड में एक विशेष कंपनी के मीटरों की सप्लाई जांच के दायरे में है। हजारों मीटर इसके हर माह डेड हो रहे हैं। इससे बोर्ड को तकनीकी खामी की वजह से लाखों का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रदेश के कई जिलों में इस कंपनी के मीटर सप्लाई हुए थे और जांच में पाया गया है कि हर माह ऐसे खराब मीटरों के डेड होने की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे बोर्ड के कर्मचारी भी परेशान हैं। उनकी बदले में इन्हें रिपलेश करने के लिए अतिरिक्त मैन पावर लगानी पड़ रही है। पिछले दो अढ़ाई महीनों में बोर्ड को इन डैड हो रहे मीटरों के कारण अच्छी खासी चपत लग चुकी है।

दोबारानहीं ली जा सकती रीडिंग की जानकारी

मीटरइंस्टाल करने के कुछ माह बाद इन मीटरों की स्क्रीन वॉश हो जाती है। यानी दोबारा इन पर रीडिंग की जानकारी नहीं ली जा सकती। स्क्रीन पर फ्लीक्रिंग जैसी स्थिति बन जाती है। जो पुरानी स्थिति पर नहीं आती। सूत्रों के मुताबिक हरेक सब डिवीजन में इस समय सैकड़ों मीटर इसी कारण हर माह खराब हो रहे हैं। हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा और कुल्लू आदि जिलों में इनकी सप्लाई पर इसी कारण अब सवाल उठ रहे हैं।