स्वाइन फ्लूः अाप रहें सतर्क
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इनसे भी इलाज संभव
ऐसे करें बचाव: {4-5तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं। {गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
कैसे करें बचाव: फइन्फ्लुएंजाइनम-200की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इसके साथ सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।
{ व्यक्ति जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण दिख रहे हों, उनसे दूरी बनाकर रखें।
{ { हाथों को साबुन से या हैंड वॉश से न्यूनतम 20 सेकंड तक धोएं।
{ भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें, जाएं तो मुंह-नाक ढंककर रखें।
भोजन ऐसा हो
{घर का ताजा खाना, ताजे फल और हरी सब्जियां खाएं। पानी खूब पिएं। { मौसमी फल जैसे संतरा, आलूबुखारा, तरबूज के अलावा सेब-अनार अच्छे हैं। { सभी दालें खा सकते हैं। काफी दिन तक फ्रिज में रखी हुई चीजें नहीं खाएं। { नींबू-पानी, सोडा शर्बत, दूध, चाय, फलों के जूस, मट्ठा-लस्सी ले सकते हैं।
{स्वाइन इनफ्लुएंजा-ए वायरस वाले मरीज के साथ हफ्तेभर का संपर्क। {जहां केस मिले हैं, उन इलाकों में जाने के 7 दिन के अंदर बुखार। {ऐसे समुदाय के लोगों से संपर्क, जहां स्वाइन फ्लू के केस मिल चुके हों।
{अनिद्रा की स्थिति, थकान महसूस होना, दवा खाने के बाद भी बुखार।
{मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना, सिर में
भयानक दर्द।
{सौ डिग्री बुखार, सर्दी-खांसी, बदन-जोड़ों में दर्द, उल्टी और ठंड लगना।
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह ए-टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है। जब मौसमी बुखार का सीजन होता है, तब भी यह वायरस सक्रिय हो जाता है।
हेल्थ रिपोर्टर| शिमला
स्वाइनफ्लू के मामले प्रदेश में भी बढ़ने लगे हैं। वीरवार को आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू सें संक्रमित महिला मरीज पहुंची है। महिला बिलासपुर की रहने वाली है। अब प्रदेश में महिला समेत कुल चार स्वाइन फ्लू के मरीजों का मामले दर्ज हो चुके हैं। जरा सी सावधानी से लोग खुद को स्वाइन फ्लू के वायरस से बचा सकते हैं। प्रदेश के अस्पतालों में इससे निपटने के लिए भी पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। किसी संदिग्ध मरीज के आने पर उसके उपचार के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बना दिया गया है।
इस वायरस की रोकथाम के लिए अस्पताल में दवाई भी उपलब्ध है। विशेषज्ञों के मुताबिक टेमी फ्लू नाम की दवाई से इसकी रोकथाम संभव है। स्वाइन फ्लू हर साल नए रूप में आता है। इस लिए इसकी वैक्सीन भी एक वर्ष के बाद खराब हो जाती है। इसके लिए नई वैक्सीन तैयार होती है।
इससेभी मिलेगी राहत
विशेषज्ञोंकी मानें तो दिन का तापमान यदि 30 डिग्री तक सात दिन तक मेंटेन रहे तो स्वाइन फ्लू का वायरस काफी हद तक बेअसर हाे जाता है। यह वायरस सर्दियों के मौसम में ही अधिक फैलता है। क्योंकि इसी दौरान ही मौसम का तापमान 30 से कम रहता है। इस बारे में अाईजीएमसी के एमएस डॉ रमेश चंद ने बताया िक आईजीएमसी स्वाइन फ्लू के मरीजों के उपचार के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।