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साहब! मुझे बार-बार क्यों कर रहे हो डिमोट

6 वर्ष पहले
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^मेरे में पास ऐसा कोई सूचना या जानकारी नहीं है। इस पुलिस कर्मी को पहले विभाग को इसके बारे में बताना चाहिए। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो इसके बारे में जांच होगी उसके बाद ही पता चल पाएगा कि इस पुलिसकर्मी के साथ ऐसा क्याें हुआ है। संजयकुमार, डीजीपी

िशमला में हेड कांस्टेबल नगीन चंद अपने परिवार के साथ।

क्राइम रिपोर्टर| शिमला

एकपुलिसकर्मी ने अपने विभाग पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। 5वीं आईआरबी बीएन बस्सी में तैनात हेड कांस्टेबल नगीन चंद ने पत्रकारवार्ता के दौरान कहा कि विभाग उसके साथ अत्याचार कर रहा है। आठ वर्षों की नौकरी में उसे दो बार डिमोट किया गया। नगीन का आरोप है कि उसे वर्ष 2007 में विभाग ने हेड कांस्टेबल के पद से प्रमोट कर एएसआई तैनात किया था। इसी दौरान उन्हें िफर हेड कांस्टेबल पद पर िडमोट िकया गया और िफर कुछ वक्त बाद सीअाईडी में ट्रांसफर कर दोबारा एएसअाई पद पर प्रमोशन दे दी। वर्ष 2013 तक वह सीआईडी में बतौर एएसआई के पद पर रहा। इसके बाद उसका तबादला 5वींं आईआरबी में कर दिया। इस दौरान भी वह एएसआई था। लेकिन उसे पीएचक्यू से कुछ कारणों से रिलीव नहीं किया गया। पुलिस विभाग ने अब तीस जनवरी को तबादले के पुराने आदेशों के तहत डिमोट कर दोबारा हेड कांस्टेबल पद पर तैनात कर दिया है। नगीन चंद का कहना है कि 35 वर्ष की नौकरी में उसने कभी विभागीय आदेशों का उल्लंघन नहीं िकया है। उसके बाद भी विभाग अत्याचार कर रहा है। रिटायरमेंट के लिए केवल दो वर्ष ही रह गए हैं। नगीन चंद ने बताया कि 19 जून 1980 को कांस्टेबल के बाद पर पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था। उसके बाद 1999 में पहली प्रमोशन मिली इसमें उसे हेड कांंस्टेबल तैनात कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2006 में एएसआई पद के लिए प्रमोट किया गया। एक वर्ष भी ही विभाग ने डिमोशन कर दी। नगीन चंद ने विभाग के आलाधिकारियों पर आरोप लगाया िक उसे बिना किसी कारण के दो बार डिमोट किया गया है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाते हुए न्याय की मांग की है।