ईएसआई को सरकार केे अधीन लेने की तैयारी
शिमला|बैठकमेंधर्मशाला-मैक्लोडगंज तथा चामुंडा-आदि हिमानी रोपवे बनाने को मंत्रिमंडल मंजूरी दी जा सकती है। इसे प्रदेश अधोसंरचना विकास बोर्ड की बैठक में इन दोनों रोपवे के अलावा पार्किंग प्रोजेक्टों पर भी चर्चा के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में ले जाने का फैसला हुआ था। शिमला में प्रस्तावित रोपवे भी आईडीबीआई की बैठक में चर्चा हो चुकी है। कैबिनेट की बैठक में विधानसभा के आगामी बजट सत्र की तारीखें तय करने बजट प्रस्तुत करने तथा सत्र की अवधि पर चर्चा हो सकती है। प्रदेश के परिवहन मंत्री जीएस बाली के बस भाड़े में कमी करने की घोषणा के बावजूद फिलहाल मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला संभव नहीं है।
मीिटंग आज
शिमला|हिमाचल प्रदेशमंत्रिमंडल की शुक्रवार को धर्मशाला में होने वाली बैठक में कई अहम मसलों पर चर्चा होना संभावित है। इसमें सबसे बड़ा मसला राज्य में वन भूमि पर तिब्बती मूल के लोगों के कब्जों को रेग्युलर करने पर मुहर लग सकती है। प्रदेश में इन कब्जों को एक समय प्रदेश हाईकोर्ट ने खाली करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद हिमाचल के तिब्बती समुदाय के जो लोग, बोनाफाइड हिमाचली है आैर लंबे समय से हिमाचल की वन भूमि पर रह रहे हैं। इन्हेें केंद्र सरकार की तिब्बती पुनर्वास पाॅलिसी 2014 के तहत राज्य वन विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है, इसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। राज्य सरकार की शुक्रवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में इसे मुहर लगाने के लिए लाया जाना है। मसले पर राज्य सरकार को ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इनके लिए पालिसी बनाने के लिए कहा है। इसके लिए राज्य ने केंद्र सरकार की इस पालिसी को आधार बनाया गया है। अब इसे राज्य में लागू किया जाना प्रस्तावित है। न्यायिक अधिकारियों को भी एंबर लाइट दी जाने की तैयारी की है। आज बैठक में फैसले होंगे।
सिटी रिपोर्टर| शिमला
हिमाचलप्रदेश सरकार ने यूपीए सरकार की आेर से हिमाचल को दिए ईएसआई अस्पताल को राज्य सरकार के अधीन लेने के कसरत शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की आेर से इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाना प्रस्तावित है। प्रदेश में यूपीए सरकार ने राज्य में ईएसआई कालेज खोलने का फैसला लिया था। इसके लिए मंडी के नैरचौक केंद्र ने जमीन चयनित कर काम भी शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 800 करोड़ के करीब आंकी गई थी। केंद्र में सत्ता बदलने के बाद वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे चलाने से इंकार कर दिया है। अब राज्य सरकार के पास से यह यूपीए की तरफ से मिला तोहफा खिसकता नजर रहा है। इस प्रोजेक्ट में पूर्व केंद्र सरकार की आेर से 500 करोड़ रुपए का निवेश भी हो चुका है। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने तर्क दी कि इसे सरकार के अधीन लेने से प्रदेश के सेंटर जोन में भी एक मेडिकल कालेज राज्य को मिल सकता है। इसमें केंद्र ने 500 करोड़ से ज्यादा का निवेश कर दिया है, राज्य को बचे हुई ही निवेश करनी है।
साथ ही मेडिकल कालेज को चलाने के लिए हर साल सौ करोड़ रुपए का खर्च ही उठाना होगा। हालांकि केंद्र की आेर से जो सुविधाएं ईएसआई कालेज में दी है। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि इसे सरकार के अधीन लेने का मामला राज्य सरकार के विचाराधीन है।मंडी के नेरचौक में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) के पहले मेडिकल कॉलेज की आधारशिला 2009 में रखी थी। अब केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अस्पताल चलाने से इंकार कर दिया है। राज्य में अभी टांडा आैर आईजीएमसी में ही मेडिकल कालेज हैं। इन दोनों में एमबीबीएस की 200 सीटें हैं।