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ब्याज सहित मुआवजा दें: हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टनेवाहन दुर्घटना में मारे गए पूर्व सैनिक के परिजनों को 8 लाख 64 हजार रुपए 6 फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने मृतक के परिजनों की अपील को स्वीकार करते हुए मुआवजा राशि की जिम्मेवारी बीमा कंपनी पर डाली है।

हादसे के 6 साल बाद मुआवजा राशि पाने में सफलता मिली। मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल हमीरपुर ने 16 जनवरी, 2013 को मृतक के परिजनों की मुआवजा राशि की मांग को ठुकरा दिया था। निचली अदालत ने क्लेम याचिका खारिज करते हुए कहा था कि दावेदार यह साबित करने में असफल रहे कि ड्राइवर की तेज रफ्तारी और लापरवाही के कारण हादसा हुआ। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल को फटकार लगाते हुए कहा कि शायद ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत धारा-168 के तहत दिए आदेशों को नहीं पढ़ा। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल उक्त अधिनियम के तहत मुआवजा देने के उद्देश्य प्रायोजन को भूल गया। मुख्य न्यायाधीश ने फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस फैसले पर कम टिप्पणी करना ही बेहतर होगा। कोर्ट ने कहा कि दावेदारों ने यह साबित किया कि ड्राइवर की तेज रफ्तारी और लापरवाही से दुर्घटना घटी थी।

हाईकोर्ट नेकहा कि ट्रिब्यूनल ने गवाहों के बयानों पर इस तरह से चर्चा की जैसी आपराधिक मामलों में की जाती है। इसके परिणाम स्वरूप दावेदारों को मुआवजे से महरुम होना पड़ा। मामले के तथ्यों के अनुसार र| चंद आर्मी से रिटायर होने के बाद हमीरपुर की देवभूमि ट्राला यूनियन में बतौर क्लर्क काम कर रहा था। जून 2008 को जब वह ट्राले में अपने घर जा रहा था तो ट्राले के दुर्घटना ग्रस्त होने से उसकी मौत हो गई। दावेदारों क्लेम ट्रिब्यूनल में 10 लाख मुआवजे की मांग की थी।