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िसर्फ हिंदी दिवस पर आती है राष्ट्र भाषा की याद
एचपीयूमें हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए सभी तरह के कामकाज हिंदी में ही किए जा रहे है। एक ओर जहां हिंदी भाषा को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर हिंदी विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को इस भाषा से दूर किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठते है कि विवि किस तरह से हिंदी भाषा को बढ़ावा दे रहा है।
इतिहास भी अंग्रेजी में
हिमाचलप्रदेश की राजधानी शिमला में ऐतिहासिक भवनों का इतिहास के बड़े-बड़े बोर्ड लगाए गए हैं। यह इतिहास अंग्रेजी भाषा में ही लिखा हुआ है। सरकार प्रशासन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दावे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन इतिहास को भी हिंदी में नहीं लिखवाया गया।
एचपीयू: छात्र 200, पढ़ाने वाला सिर्फ एक
प्रदेशके सबसे बड़े शिक्षण संस्थान प्रदेश विवि में भी हिंदी उपेक्षित है। प्रशासन एक तरफ हिंदी दिवस बड़े बड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। दूसरी ओर विवि के हिंदी विभाग में शिक्षकों के अभाव से छात्र परेशान हैं। 200 छात्रों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक ही प्रोफेसर हैं। वह विभागाध्यक्ष का काम भी देख रही हैं, साथ ही छात्रों की कक्षाएं भी लगा रही हैं। हिंदी भाषा की इस प्रकार की अनदेखी से छात्रों में रोष व्याप्त है। विवि में प्रोफेसरों के 14 पद स्वीकृत हैं, जबकि यहां पर सिर्फ एक ही पद भरा हुआ है, अन्य पद खाली पड़े हुए हैं। छात्रों की कक्षाएं लगने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। विवि प्रशासन ने पिछले सप्ताह खाली पद भरने के लिए विज्ञापन जारी किया है।
भास्कर न्यूज | शिमला
हिंदीकोराष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त है। साल भर यह भाषा उपेक्षा का शिकार रहती है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हिंदी भाषा के महत्व के साथ खूबियों का खूब बखान होता है। कार्यक्रम खत्म होते ही भाषा की उपेक्षा शुरू हो जाती है। साल भर तक यह उपेक्षा होती है। बात चाहे सरकारी कार्यक्रम की हो या फिर दफ्तरों में कामकाज की। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक हिंदी भाषा के बजाए अंग्रेजी को ही महत्व देते हैं। हिंदी दिवस के मौके पर ही राष्ट्र भाषा की तरफ यह प्रेम उमड़ जाता है।
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