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पीटीए पॉलिसी को संघ कोर्ट में देगा चुनौती

7 वर्ष पहले
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कॉलेजोंमें जनरल हाउस में शिक्षक पैरेंट्स भाग लेते हैं। इसमें 5 सदस्यीय कार्यकारिणी बनाई जाती है। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष होते हैं। महासचिव शिक्षक चुना जाता है बाकी सभी गैर शिक्षक में से। सभी शिक्षक और पैरेंटस इस सदस्य होते हैं। इसके बाद एग्जिक्यूटिव बॉडी को चुनाव होता है। इसमें 6 सदस्यों को चुना जाता है। जिसमें तीन टीचर और तीन गैर शिक्षक शामिल किए जाते हैं।

भास्कर न्यूज | शिमला

कॉलेजोंमेंपैरेंट्स टीचर एसोसिएशन (पीटीए) में तीन शिक्षकों रखने की शर्त हटा दी है। कॉलेज शिक्षकों के पीटीए में शामिल होने से इंकार करने के बाद ये फैसला लिया गया है। पीटीए की एग्जिक्यूटिव बॉडी 6 सदस्यों की बनाई जाती थी। इसमें 3 कॉलेज शिक्षक शामिल होते थे जबकि 3 नॉन ऑफिशियल मेंबर पैरेंट्स में से लिए जाते थे। नए आदेशों में तीन शिक्षक यदि पीटीए में शामिल नहीं होना चाहते तो 1 या फिर दो सदस्यों को शामिल किया जाएगा। प्रदेश भर में कॉलेज कॉडर के करीब 1600 लेक्चरर्स हैं।

बिनाटीचर औचित्य नहीं

पीटीएपॉलिसी में किए संशोधन को लेकर कॉलेज प्राध्यापक संघ भड़क गया है। संघ के अध्यक्ष डा. आरके कायस्था ने कहा कि सरकार ने पीटीए पॉलिसी बनाई है उसे कोर्ट में चुनौती देंगे। बिना शिक्षक पीटीए बनाना उचित नहीं है। इस पर संघ सभी पदाधिकारियों से राय ले रहा है।

2005 में पीटीए का गठन किया था। शुरु से ही पीटीए में शामिल होने को लेकर शिक्षकों का विरोध रहा है। 9 उद्देश्यों के लिए इसका गठन किया जाता है। शिक्षक भर्ती केवल विशेष परिस्थितियों में यानी गैप को पूरा करने के लिए अस्थाई तौर पर की जाती है यह एक मात्र उद्देश्य था। कॉलेजों में किस तरह कार्य हो सकते हैं, छात्रों और स्टूडेंट की भागीदारी, इंट्रैक्शन बढ़ाना, कम्यूनिकेशन स्टूडेंट और टीचर इसके लिए किया गया था।