रैंगिंग गैर कानूनी अमानवीय कृत्य
हिमाचलप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके शर्मा ने रैंगिंग को गैर कानूनी एवं अमानवीय कृत्य करार देते हुए बताया कि रैंगिंग करने वाला छात्र ही अपराधी की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि घटनास्थल पर मौजूद अन्य मूक दर्शक भी अपराधी हंै। न्यायमूर्ति वीके शर्मा सोमवार को एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में शैक्षणिक संस्थाओं में रैंगिंग विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला में मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यशाला का आयोजन विवि के विधि विभाग ने किया। न्यायमूर्ति वीके शर्मा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रैंगिंग को परिभाषित करने के लिए वर्ष 2009 में सीबीआई के पूर्व निदेशक डा. आरके राघवन की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था। जिसकी सिफारिशों के आधार पर रैंगिंग को परिभाषित करते हुए गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है। कुुलपति डा. गोलाकुटी ने कहा कि एक दूसरे के प्रति आदर का भाव रखना ही रैंगिंग की रोकथाम है।