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एससीए चुनाव को लेकर छात्र निरुत्साहित

7 वर्ष पहले
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मेरिटोरियस तलाशना भी बड़ी चुनौती

िवविऔरकॉलेज प्रशासन के लिए मेरिटोरियस छात्र की तलाश करना चुनौती बनी हुई है। मेरिटोरियस छात्र राजनीति से दूर रहकर पढ़ना चाहते हैं। ऐसे में वे चुनाव की प्रक्रिया में भाग लेना नहीं चाहते हैं। ऐसे में विवि और कॉलेज प्रशासन किन्हें एससीए में लाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।

हिंसारोकने के लिए अच्छी पहल

कैंपसमेंलगातार हो रही हिंसा को रोकने के लिए इस पहल को अच्छा भी माना जा रहा है। छात्र संगठनों के बीच होने वाली हिंसा को देखते हुए इस प्रयास का जहां सरकार समर्थन कर रही है, वहीं शिक्षक वर्ग भी प्रशासन का साथ दे रहे हैं। हालांिक छात्र संगठन विरोध में हैं।

बिना पोस्टर बैनर के बेरंग है परिसर

इनदिनोंकैंपस में तो पोस्टर नजर रहे हैं और ही बैनर नजर रहे हैं। छात्र संगठनों के प्रतिनिधि आंदोलन तो कर रहे हैं लेकिन कैंपस में चुनाव जैसा माहौल नहीं है। ऐसे में छात्र नेताओं का भविष्य भी दांव पर है। एचपीयू से राष्ट्रीय स्तर पर छात्र राजनीति से बड़े नेता पहुंचे हैं। ऐसे में कैसे छात्र नेता देश राजनीति में अपने कदम रख पाएंगे।

भास्कर न्यूज | शिमला

छात्रनेताचुनने के लिए होने वाली छात्र संसद के चुनाव इस बार फीके नजर रहे हैं। मनोनयन आधार पर होने वाले चुनाव सिर्फ प्रशासन पर ही टिके हैं। इसमें तो छात्रों की भागेदारी सुनिश्चित हो रही अौर ही छात्रों की इसमें रुचि है। एससीए चुनाव की जो प्रक्रिया शुरू की गई है, उसमें सिर्फ प्रशासन की ओर से ही मेरिट बनाई जा रही है।

मेरिट के आधार पर एससीए का गठन होगा। जो छात्र पढ़ाई में अव्वल होगा, उसको एससीए में चयनित किया जाएगा। ऐसे में आम छात्रों छात्रों को नहीं पता, कैसे होंगे चुनाव की इसमें कोई भागेदारी नहीं है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन जिस तरह से प्रशासनिक फैसले लेता है, उसी तरह से चुनाव की प्रक्रिया भी हो रही है। इसीलिए इस बार चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है। प्रशासन की इस मनोनयन प्रक्रिया के कारण छात्रों से वोट देने का अधिकार छीना गया है।

स्टूडेंट्सको नहीं पता कैसे होंगे चुनाव

}िहमाचलप्रदेशविश्वविद्यालय सहित कॉलेजों में होने वाले छात्रसंघ चुनाव के बारे में अधिकतर छात्रों को अभी तक पता ही नहीं है। संजौली, कोटशेरा अौर आरकेएमवी में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं का कहना है कि चुनाव की हिंसा खत्म करने के लिए प