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निष्कासित होंगे हिंसा करने वाले छात्र

7 वर्ष पहले
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समरहिल से बालूगंज तक वाहनों में लोग हुए परेशान

एचपीयूनिवर्सिटी ने हिंसा में संलिप्त रहने वाले छात्रों के निष्कासन का फैसला लिया है। प्रशासन ने कुलपति के साथ छात्रों की बदसलूकी के बाद इस तरह के निर्णय लिया है। इनमें वह छात्र भी शामिल हैं, जो बीते दिनों हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल रहे थे। इन्हें प्रशासन की ओर से राहत दी गई थी, लेकिन अब उन्हें भी कैंपस से निष्कासित किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एडीएन वाजपेयी ने छात्र संगठनों को चेतावनी दी है कि वे कानून अपने हाथ में लें तथा विश्वविद्यालय में पढ़ाई का शांतिपूर्ण माहौल ख़राब करें। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से बहुत से छात्र गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त हंै। ऐसे में उन्हें जल्द ही विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जाएगा।

कुलपति का कहना है कि उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णय के अनुसार 200 मीटर के दायरे में शोर शराबा करने वाले शरारती तत्वों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी। प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ रहे टकराव से एचपीयू में आने वाले समय में माहौल खराब हो सकता है। यदि छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी रहता है तो प्रशासन की ओर से कैंपस में कड़े निर्णय लिए जाएंगे। जिसका सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को होगा। कक्षाएं लगने के कारण छात्राें का सिलेबस भी पूरा नहीं हो पाएगा। छात्र संगठन और प्रशासन की आपसी लड़ाई के कारण आम छात्रों को दिक्कतें होंगी।

एचपीय कर्मियों को उठानी पड़ी परेशानी

एचपीयूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को भी चक्का जाम के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। एचपीयू की बसें भी बालूगंज में जाम में फंसी रही। कर्मचारियों और छात्रों को वहां से पैदल ही परिसर आना पड़ा। जाम के कारण कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पाए। दूरदराज क्षेत्रों से फार्म भरवाने अाए छात्रों को बिना काम करवाए ही वापस लौटना पड़ा। कैंपस में चल रहे धरने प्रदर्शन के कारण समरहिल चौक पर दुकानदारों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। आक्रोश से कैंपस में दिन प्रतिदिन शैक्षणिक माहौल खराब होता जा रहा है।

एफएफआई के समरहिल चौक पर बुधवार को हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय के छात्र छात्राएं।

प्रशासन की ओर से 1995 से वर्ष 2000 तक चुनाव को बंद किया गया था। उस समय भी प्रदेश के