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बीबीएन में बनी सात दवाइयों के सैंपल फेल

7 वर्ष पहले
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बीबीएनकी फार्मा कंपनियों में उत्पादित हो रही सात दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं। इसके बाद यहां बनने वाली दवाइयों की गुणवत्ता एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की ओर से जारी ड्रग अलर्ट लिस्ट के अनुसार जिन कंपनियों की दवाइयों के सैंपल हुए हैं, उनकी फैक्टरियां बीबीएन में हैं। इससे पहले भी प्रदेश में बनी दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर कई मामले सामने चुके हैं। इससे पहले भी दवा नियंत्रक विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों से दवाइयों के सैंपल लिए हैं। इसकी जांच रिपोर्ट में प्रदेश में बनी सात दवाइयों की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई।

^प्रदेश में बनने वाली दवाइयों की गुणवत्ता बार-बार सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी प्रदेश में बनी दवाइयों के सैंपल फेल हो चुके हैं। इस वर्ष ही प्रदेश में बनी दो दर्जन से अधिक दवाइयों के सैंपल अन्य फेल हो चुके हैं। अप्रैल में नौ, जून में सात के करीब और अब सात दवाइयोें के सैंपल फेल हुए हैं। यह दवाइयों प्रदेश की जिन जिन कंपनियों में बनी हैं राज्य दवा नियंत्रक विभाग उन्हें नोटिस देगा। कंपनी प्रबंधन की ओर से जवाब आने के बाद विभाग इन कंपनियों पर कार्रवाई करेगा। नवनीतमरवाह, स्टेटड्रग कंट्रोलर

रिपोर्ट के मुताबिक आईब्रूफेन टेबलेट आईपी 400 एमजी, बद्दी के थाना की एक कंपनी सेमोल प्लस सस्पेंशन, महाकैफ 500, रेमिप्रिल टैबलेट 2.5 एमजी(एल्डाप्रिल 2.5), सेल्बूटामोल टैबलेट आईपी 4 एमजी, डाइक्लोफेनेक सोडियम जैल 1 फीसदी, (स्पोर्ट जैल)रबेपराजोल एंड डाेमपेरीडन सस्टेंड रीलीज कैप्स (रबेला डीएसआर कैप्स) दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं।

रीजनल ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री, गुवाहटी में देश के अलग-अलग हिस्सों से लिए दवाइयों के सैंपलों की जांच की गई। इन सैंपलों में प्रदेश में बनी दवाइयां भी शामिल हैं। जांच के दौरान प्रदेश में बनी दवाइयों की डिस्सोल्यूशन, एसिड में के कंटेंट में कमी, सोल्यूशन की क्लियरिटी सही होने सहित अन्य कारणों के चलते सैंपल फेल हुए हैं।