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\"कांग्रेस भवन नियमित करने को लाई पॉलिसी\'

7 वर्ष पहले
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अवैधभवनोंको नियमित करने के लिए सरकार द्वारा लाई पॉलिसी आंखों में धूल झोंकने वाली है। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि पॉलिसी आम जनता के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस भवन को नियमित करने के लिए लाई गई है। आम जनता का पॉलिसी में ज्यादा ध्यान नहीं रखा गया है।

जो रेट रेगुलराइजेशन के लिए कंपाउंड करने के लिए लाए लाए गए है वह आम जनता की पहुंच से बाहर है। पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ गिने चुने बिल्डरों को खुश करने के लिए सरकार यह पॉलिसी लाई है। पार्टी ने सरकार से इस पॉलिसी पर पुर्न विचार करने की मांग की हैं। अवैध भवनों डाइवेशन के रेट इतने अधिक हैं कि आम गरीब आदमी इस पॉलिसी के तहत अपने भवनों को नियमित नहीं करवा सकता। पॉलिसी में जहां एंटिक बेसमेंट को भवन की मंजिल मानी है। 6 मंजिल तक नियमित रेगुलराइज करने की बात कही गयीं है। बेसमेंट और एंटिक को मंजिल माना जाए तो केवल 4 मंजिलें ही नियमित हो पाएगी। जबकि मर्ज एरिया में लोगों ने 7 मंजिलें तक बना रखी है। भाजपा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने कुछ गिने चुने लोगों तथा बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए नयी भवन नियमितीकरण पॉलिसी को लाया है।

यहां उठाई आपत्ति

इसपॉलिसी में जहां जैसी बिल्डिंग्स का नियमितिकरण होगा या जिन लोगों ने पिछले काफी समय से अपनी नक्शे दे रखे थे, जो किसी तकनीकी कारणों से रेगुलराइज नहीं हो सके थे। वे रेगुलराइज होंगे या जिनके नक्शे रिजेक्ट हुए थे उन्हें भी नियमितिकरण की श्रेणी में लाया जाएगा। भाजपा ने सरकार से पूछा है कि 70 प्रतिशत अवैध निर्माण तक के भवनों को नियमित करने के पीछे का उद्देश्य क्या है। 70 प्रतिशत तक की लाइन किस लिए खींची गई है, कम या ज्यादा क्यों नहीं ? सरकार को इस पर स्पष्ट करना चाहिए।

8-10लाख का होगा खर्चा

जोरेट रेगुलराइजेशन के लिए कंपाउंड करने के तय कि हैं उसमें कई लोगों को एक मंजिल नियमित कराने के लिए 8 से 10 लाख तक जुर्माना देना पड़ सकता है। जिस की एक भी मंजिल नक्शे के अनुसार नहीं बनी है और उसका नक्शा पास नहीं है तो उसे 1 करोड़ रुपए तक भी जुर्माना देना पड़ सकता है। सरकार की पॉलिसी व्यवहारिक नहीं है। सरकार को स्पष्ट पॉलिसी लानी चाहिए जिससे आम लोगों का भला होता।

कांग्रेस भवन पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

प्रदेशकांग्रेस भवन पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। इसकी पार्किंग फ्लोर से