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एनओसी नहीं, अफसरशाही भ्रष्टाचार खत्म करें वीरभद्र
पूर्वमुख्यमंत्रीनेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को खुला पत्र लिखा है। बिजली प्रोजेक्ट लगाने के लिए एनओसी की शर्त हटाने के संबंध में यह पत्र लिखा गया है। धूमल ने कहा कि जलविद्युत प्रदेश के लिए राष्ट्र की समृद्धि में देने के लिए सबसे बड़ा योगदान। राज्य की आय का सबसे बड़ा साधन भी है। संसाधन सदा बना रहे इसके लिए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्राकृतिक वातावरण बना रहे।
इसके कारण विद्युत उत्पादन के स्रोत हमें उपलब्ध हैं। सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का गला कहीं इस लालच में मरोड़ दें कि सारे के सारे सोने के अंडे एक दिन में ही मिल जाएंगे। प्रदेश सरकार और भारत सरकार ने ऐसी शर्तें लगाई की जिन से संतुलन रखा जा सके और जलविद्युत उत्पादन भी हो। इसके लिए लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, मच्छली पालन विभाग, विद्युत बोर्ड, पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त है ताकि विद्युत प्रोजेक्ट बनने से उनके किसी भी पहले से चल रहे प्रोजेक्ट पर कोई दुष्प्रभाव पड़े या इन विभागों का कोई प्रोजेक्ट प्रभावित नहीं हो। नए बनने वाले विद्युत प्रोजेक्ट बनने से कोई दुष्प्रभाव का पूर्व अनुमान होगा तो उसका पहले ही समाधान खोज लिया जाए और उससे बचने के लिए पहले जरूरी कदम उठा लिये जाए।
..तो किसी प्रकार के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं
धूमलने कहा कि सेमिनार में मुख्यमंत्री ने जो वक्तव्य दिया है उस से यह लगता है कि विद्युत उत्पादकों को किसी भी प्रकार की अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं रहेगी। तो फिर इन विभागों के प्रोजेक्ट्स के हितों की रक्षा कैसे होगी। कई पावर प्रोजेक्ट्स इस से पहले भी रद्द करने पड़े थे क्योंकि वे मत्सय और सिंचाई एवं स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को प्रभावित करने वाले थे।
धूमल ने कहा कि विद्युत उत्पादकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एनओसी की शर्त खत्म करना इसका समाधान नहीं है। दोनों में संतुलन बनाना होगा। वर्तमान परिस्थितियों में उचित यही होगा कि उपलब्ध डाटा का सही निरीक्षण हो लालफीताशाही (अफसरशाही) और भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए और विभाग के लिए प्रस्ताव पर विचार करने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाए। तय सीमा के भीतर स्वीकृति या अस्वीकृति दी जाए। सड़क, पुल, पेयजल योजनाएं, मच्छली पालन, विद्युत सप्लाई में य