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\"सील्ड रोड पर किसे दिए परमिट हमें बताओ\'

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने प्रधान सचिव परिवहन सहित, जिला उपायुक्त शिमला और पुलिस अधीक्षक को शपथ पत्र दायर कर यह स्पष्ट करने को कहा कि शिमला की सील्ड प्रतिबंधित मार्गों पर एचआरटीसी टैक्सियों को चलाने के लिए कितने परमिट जारी किए गए हैं। कोर्ट ने ऐसे सभी परमिट होल्डरों के नाम और इन टैक्सियों को चलाने वालों के नाम भी बताने को कहा है। मुख्य न्यायधीश मंसूर अहमद मीर न्यायधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने शिमला रोड यूजर्स एंड पेडेस्टरेंस एक्ट 2007 के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस अधिनियम का मकसद शिमला शहर की पवित्रता बनाए रखना है। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का एक मात्र उद्देश्य शिमला शहर की सुंदरता को बरकरार रखना है।

हाईकोर्ट ने शिमला शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर बेतरतीब दौड़ रहे वाहनों पर लगाम लगाए जाने से जुड़े जनहित मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव सहित अन्य प्रतिवादियों के जवाबों पर नाराजगी जताई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहर में दौड़ रही एचआरटीसी टैक्सियां जिस उद्देश्य को लेकर चलाई जा रही है, वह इस उद्देश्य को पूरा करने में असफल रही है। बुजुर्गों बच्चों को इन टैक्सियों में प्राथमिकता देने के आदेशों पर सख्ती से पालन करने के आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि एचआरटीसी टैक्सियों का संचालन कोर्ट द्वारा पहले से जारी दिशा निर्देशों के तहत किया जाए। यदि कोर्ट के समक्ष किसी तरह के उल्लंघन की बात ध्यानार्थ लाई जाती है, कि ऐसे उल्लघंन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ज्ञात रहे कि एचआरटीसी टैक्सियों को चलाने के लिए अनुमति देते समय कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई थी। जिसमें बुजुर्गों बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर इन टैक्सियों में जगह देना, टैक्सियों की गति सीमा 20 किलोमीटर से अधिक होना, ड्राइवरों को हमेशा वर्दी में होने की शर्तें थी। परन्तु इन सभी शर्तों का उल्लघंन होने के कारण कोर्ट ने उपरोक्त अादेश जारी किए हंै।