हिमुडा के भवनों को नहीं िमलेगा लाभ
राजधानीके सबसे महंगे माने जाने वाले न्यू शिमला एरिया में बने भवनों को टीसीपी एक्ट में संशोधन का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके लिए सरकार की आेर से लाए गए अध्यादेश में साफ है कि हिमुडा के तहत बने भवनों को इसमें कोई राहत नहीं मिलेगी। राजधानी ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य भागों में बने हिमुडा की कालोनियों को इसमें राहत नहीं मिलेगी। इसमें परवाणू, नालागढ़, हमीरपुर, से लेकर पूरे प्रदेश में हिमुडा की कालोनियां शामिल हंै। अध्यादेश पर हुई कार्यशाला में पूछे गए प्रश्न के जवाब में साफ है कि प्रदेश में हिमुडा की ओर से बनाई गई आवासीय कालोनियों अौर प्लाटों में बने भवनों को टीसीपी एक्ट में किए गए संशोधन ने राहत नहीं मिल रही है। संशोधित टीसीपी एक्ट में साफ तौर पर हिमुडा कॉलोनियों, अपार्टमेंट और प्राइवेट बिल्डर की ओर से बनाए गए भवनों में की गई डेविएशन को रेगुलर नहीं किया जाएगा। एक्ट के इस प्रावधान से हिमुडा और अन्य प्राइवेट बिल्डर की ओर से बनाए गए हजारों भवनों में हुई डेविएशन रेगुलर नहीं होगी। सरकार की ओर से लाए गए इस अध्यादेश में हिमुडा के भवनों को राहत मिलने से नाराज लोगों ने प्रदेश सरकार से उन्हें भी राहत देने की मांग की है।
राहत को लेकर टीसीपी विभाग से मिले लोग
हिमुडाकी आवासीय कालोनियां और प्राइवेट बिल्डर की ओर से बनाई कालोनियों में रह रहे लोगों को एक प्रतिनिधिमंडल टीसीपी विभाग के उच्चाधिकारियों से राहत की मांग को लेकर मिले हैं। प्रतिनिधिमंडल निगम के आर्किटेक्ट प्लानर केएस चौहान से भी मांग को लेकर मिले। कालोनियों के भवन मालिकों का कहना है कि जब सबके लिए एक्ट में संशोधन करके राहत प्रदान की गई है तो इससे उन्हें वंचित रखना उनके साथ नाइंसाफी है।
शहर में मालरोड, यूएस क्लब के बाद न्यू शिमला सबसे ज्यादा महंगा क्षेत्र माना जाता है। घरों के किराए से लेकर भवनों की कीमत भी करोड़ों में ही लगाई जाती है। ऐसे क्षेत्र को संशोधन से बाहर रखने के मामले में स्थानीय लोगों में खासा रोष है। शिमला में ही हिमुडा की कालोनी फ्लावर डेल, संजौली, जाखू आैर शोघी में भी है।