कोलकाता में खुलेगा सिरिंज का राज
पांच रुपए के चक्कर में जिंदगी का दाव
यूज्डसिरिंज मामले में दवा नियंत्रक विभाग की सूचना मिलने के बाद सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) का इंस्पेक्टर भी आईजीएमसी पहुंचा। इंस्पेक्टर ने सोमवार सुबह आईजीएमसी पहुंचकर जब्त किए गए सिरिंज के सैंपल लिए। सैंपल को जांच के लिए कोलकाता लैब में भेजा गया है। मामले के अति संवेदनशील होने के कारण राज्य दवा नियंत्रक विभाग ने दूसरी एजेंसी से जांच कराने का निर्णय लिया है। राज्य दवा नियंत्रक विभाग की टीम ने दूसरे दिन भी अपनी जांच जारी रखी। दवा नियंत्रक विभाग ने काउंटर से जब्त किए गए सिरिंज के स्टॉक की जांच की। रविवार शाम तक इंस्पेक्टर ने 5400 सिरिंज की जांच की है। इस दौरान किसी भी सिरिंज में खून के दाग नहीं मिले हैं। लेकिन गंभीर मामला होने के चलते दवा नियंत्रक विभाग ने इस बैच के सैंपल लेकर अपनी लैब में भेज दिए हैं। राज्य दवा नियंत्रक विभाग ने इस बैच के सैंपल जांच के लिए दो लैब में भेजे हैं। जब तक इस बैच की सिरिंज की जांच रिपोर्ट नहीं आएगी तब तक इसे बेचने पर रोक लगा दी गई है। इसके बारे में ड्रग इंस्पेक्टर गरीमा शर्मा का कहना है कि इस के बारे प्रदेश के दवाई विक्रेताओं काे फोन और लिखित रूप में सूचित कर दिया जाएगा।आईजीएमसी के ट्यूब काउंटर से जिस बैच की सिरिंज में खून के धब्बे मिलने का मामला सामने आया है। उसमें से 600 सिरिंज बिक चुकी हैं। काउंटर मालिक की ओर से सिरिंज खरीद के जो बिलों के मुताबिक उसके पास 6 हजार सिरिंज का स्टॉक था। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि इनमें से जिन सिरिंजों को ब्लड सैंपल लेने के लिए प्रयोग क्या गया है वह इंफेक्टेड तो नहीं थे। यूज्ड सिरिंज मामले में दवा नियंत्रक विभाग ट्यूब काउंटर मालिक को सप्लाई करने वाले का रिकार्ड भी खंगालेगा। छानबीन से अभी तक सामने आया है कि काउंटर मालिक ने लोकल थोक विक्रेता से ही इस बैच की सिरिंज खरीदी है। विभाग सप्लायर को जांच के दायरे में लाएगा। जांचकर्ता ड्रग इंस्पेक्टर गरिमा शर्मा का कहना है कि सैंपल की जांच आने के बाद ही पता लग पाएगा कि बैच में संक्रमित सिरिंज है या नहीं। उनका कहना है कि काउंटर मालिक द्वारा सिरिंज के जो बिल पेश किए गए हैं।
िसरिंज की नीडल में लगे थे खून के धब्बे
मरीजमेरे पास सिरिंज लेकर आया। जैसे ही मैने सिरिंज का रैपर खोला तो मुझे उसके केप क