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थेलेसीमिया से निपटने के लिए ‌‌40 लाख मंजूर

7 वर्ष पहले
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प्रदेशमें थेलेसीमिया के खतरे को कम करने के लिए केंद्र राज्य सरकार की कवायद शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने पहली बार थेलेसीमिया रोग को समाप्त करने के लिए 40 लाख रुपए का एक प्रोजेक्ट मंजूर किया है।

यह प्रोजेक्ट नेशनल हेल्थ मिशन योजना के तहत मंजूर किया गया है। राज्य सरकार ने \\\'थेलेसीमिया प्रिवलेंस इन एचपी\\\' प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा था केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूर किया इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत पहले चरण में प्रदेश में कॉलेज जाने वाल 2500 युवाओं पर अध्ययन किया जाएगा।

खूनके सैंपल लिए जाएंगे

इनयुवाओं के रक्त के सैंपल जांच के लिए एकत्रित किए जाएंगे। जांच के दौरान युवाओं में थेलेसीमिया के कारणों का पता लगाया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे गुप्त रखा जाएगा, अगर किसी युवा में थेलेसीमिया के लक्ष्ण पाए गए तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उस व्यक्ति के साथ कॉउिसलिंग करेगा।

एेसा प्रदेश में पहली दफा होगा, जब थेलेसीमिया रोग से ग्रसित मरीजों का पता लगाकर इस रोग की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

रोगियोंका सही आंकड़ा नहीं

प्रदेशमें थेलेसीमिया से ग्रसित मरीजों का सही आंकड़ा सामने नहीं पाया है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की मदद कर रही उमंग फाउंडेशन गैर सरकारी संस्था के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव के मुताबिक प्रदेश में इस समय 25 मरीज थेलेसीमिया कैरियर है। इस रोग से पीड़ित मरीजों का सही पूरी जानकारी सामने लाने के लिए प्रदेश में पहली दफा इन मरीजों का सर्वे किया जाएगा। यह रक्तविकार अनुवांशिक है। माता-पिता अगर दाेनो ही थेलेसीमिया से पीड़ित है तो ऐसे में पैदा होने वाले बच्चे में 33 प्रतिशत संभावना थेलेसीमिया रोग की बड़ जाती है। जो उर्म भरी बनी रहती है।

व्यक्ति में इस रोग के लक्ष्ण का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनसे संपर्क साध कर उन्हें एेसे व्यक्ति के साथ विवाह करने की सलाह देगें, जो थेलेसीमिया से ग्रसित होंगे। विवाह करने से पूर्व उन्हें अपने जीवन साथी का थेलेसीमिया का टेस्ट करवाने की भी सलाह देगें जो बाद में उनके बच्चों के लिए फायदेमंद रहेगा। इस बीमारी से ग्रसित मरीज की जिंदगी दूसरों से मिलने वाले खून दवाइयों पर निर्भर है। ऐसे मरीजों को महीने में कई बार रक्त चढ़ाया जाता है।

^थेलेसीमिया रोग को जड़ से समाप्त करन