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दावे झूठे, वन भूमि पर भी काटा एक पेड़

7 वर्ष पहले
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तारादेवीमेंहुए अवैध पेड़ कटान में एक पेड़ वन विभाग की भूमि पर भी कटा है। राजस्व विभाग द्वारा दोबारा करवाई गई पैमाइश में इसका खुलासा हुआ है। बुधवार को नायब तहसीलदार की तरफ से रिपोर्ट वन विभाग और पुलिस विभाग को सौंप दी है। हाईप्रोफाइल मामले पर कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में बताया है कि 476 पेड़ निजी भूमि पर कटे हैं। 1 पेड़ वन विभाग की भूमि पर काटा है। अभी तक सरकार की तरफ से यही कहा जा रहा था कि सभी पेड़ निजी भूमि पर काटे गए हैं। इस रिपोर्ट के बाद अब पुलिस की जांच भी बदल जाएगी। इस मामले में गिरफ्तारी हो सकती है।

कुल 477 पेड़ काटे थे। यह सभी पेड़ बिना परमिशन के ही काटे गए हैं। इस प्लॉट की तीसरी बार डिमार्केशन हो चुकी है। पहली बार सेल डीड के समय डिमार्केशन करवाई थी। दूसरी बार राजस्व विभाग ने डिमार्केशन करवाई थी। इस की रिपोर्ट में कहा था कि कोई भी पेड़ वन भूमि पर नहीं कटा है। जिला प्रशासन ने कानूनगो को सस्पेंड कर दिया था। तीसरी बार हुई डिमार्केशन में एक पेड़ वन भूमि पर निकला है।

छह अधिकारी हो चुके सस्पेंड

अवैधकटान मामले में अब तक छह अधिकारी सस्पेंड हो चुके हैं। इसमें पांच वन विभाग के एक राजस्व विभाग का कानूनगो है। वन विभाग के अधिकारियों में फोरेस्ट गार्ड, बीओ, रेंज आफिसर, एसीएफ डीएफओ को सस्पेंड किया है। सभी पर विभागीय जांच बैठाई गई है।

तारादेवी में अवैध कटान मामले में इस बार विधानसभा सत्र में खूब हंगामा हो रहा है। विपक्ष इस मामले को लेकर वन मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है। अवैध कटान का आरोपी अमरीक सिंह अभी तक फरार है। पुलिस की टीमें आरोपी की तालाश कर रही है। अभी तक पुलिस के हाथ आरोपी नहीं चढ़ सका।

डिमार्केशन से पता चला है कि व्यक्ति की 38 बीघा 7 बिस्वा निजी भूमि है। उसके साथ वन विभाग की जमीन है। डिमार्केशन में निजी भूमि की बाउंडरियों की पैमाइश की गई। अधिकारियों ने पैमाइश के दौरान पाया कि व्यक्ति ने एक पेड़ सरकारी वन भूमि में काटा है। वहीं 477 पेड़ बिना परमिशन के निजी भूमि में काट दिए।