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एकल नािरयों के लिए बने न्याय पंचायत

7 वर्ष पहले
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एकलमहिलाएं ससुराल से तंग आकर अकेले मायके में रह रही है। इसे भाग्य कि विडंबना कहें या कुछ और। ऐसी महिलाएं मायके में भी अपने मां बाप के लिए कब तक बोझ बनेगी। यह महिला अकेले ही अपना कमरा किराये पर लेकर रह रही हैं। लेकिन पूरी उम्र निकल गई अभी तक न्याय नहीं मिला। इन महिलाओं के पास केस लड़ने के लिए वकीलों को देने के लिए कोई पैसे नहीं है। इसके लिए हर पंचायतों में न्याय पंचायत अलग से होनी चाहिए प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एकल नारी शक्ति संगठन की स्टेट कॉर्डिनेटर निर्मल चंदेल ने कहा उन्होंने कि कांग्रेस पार्टी पिछले साल चुनावी घोषणा पत्र में स्वायत न्याय पंचायत की स्थापना का वायदा किया था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।

लड़रही हैं अकेली

एकलमहिलाओं को आज भी न्याय नहीं मिल रहा है। वह धक्के खाने को मजबूर है। उनके पास कोर्ट में जाने और एडवोकेट को देने के लिए इतने पैसे नहीं है कि वह अपने लिए न्याय की मांग कर सके। वह पिछले कई वर्षों से इन महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लड़ रही है। लेकिन न्याय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हिमाचल में 2001 की जनगणना के अनुसार ढाई लाख विडो, तलाक शुदा, अविवाहित महिलाएं एकल है। इसके अलावा उन्हींने सरकार से मांग की है कि तीन साल मायके में रह रही एकल महिलाओं को जिनके पति लापता है उन्हें भी पूरी सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का कानून सात साल तक पति लापता हो तो उसके बाद ही इन एकल महिलाओं को प्रमाण पत्र मिलता है लेकिन यह गल्त है। उन्होंने मांग की है कि महिलाओं को तीन साल बाद यह प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए।

रहीदिक्कतें

पंचायतप्रधान कमला शर्मा बिलासपुर पंचायत साई खारसी की प्रधान कमला शर्मा ने कहा कि उनके पास सात वार्ड है और सात मेम्बर है। विकास के काम ज्यादा है। ऐसे में महिलाओं के झगड़ो को निपटाने में दिक्कतें आती है। इसके लिए न्याय पंचायत होनी चाहिए। जिसमें गांव के बुजुर्ग जिन्हें हर घर परिवार गांव की जानकारी हो अौर वह न्याय ठीक ढंग से कर सके।

ऐसे लोगों को इसमें न्याय देने के लिए चुना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव के परिवार के काफी झगड़े आते है जिसमें पहले पति की अपने घर में बीबी है और वह दूसरी शादी कर लेते है उन्होंने कहा कि ऐसा कानून होना चाहिए की पति दूसरी शादी ही कर सके। उन्होंने कहा कि एक महिलाएं अपने गांव से बाहर अपनी लड़ाई लड़ने नहीं