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बंदरों के निर्यात के लिए हाईकोर्ट से गुहार
राज्यसरकारने बंदरों से निजात पाने के लिए उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि इन्हें वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत वर्मिन (कीड़े मकोड़े) घोषित किया जाए। इनके निर्यात से रोक को कुछ समय के लिए हटाया जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार से एक करोड़ 20 लाख इस कार्य के लिए स्वीकृत करने के निर्देश दिए जाने की मांग की है। सरकार ने बंदरों के रहने के लिए फलदार पौधे जंगलों में रोपित करने के लिए 20 करोड़ रुपए कैंपा प्रोजेक्ट के तहत दिए जाने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने 12 नवंबर को पारित आदेशों के तहत राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह बंदरों से प्रदेश के लोगों को निजात दिलाने के लिए बैठक करें वास्तु स्थिति से कोर्ट को अवगत करवाए।
सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि बंदरों से निजात दिलाने के लिए बनाई योजना के समाधान के लिए कोल डैम प्रोजेक्ट ने कैंपा फंड के तहत 21 लाख जमा करवा दिए हैं। जंगलों में फलदार पौधे रोपित करने के लिए पर्याप्त पौधे मुहैया करवा दिए हैं। आने वाले वर्ष में कैंपा फंड को लागू करने के लिए भी प्रयास जारी है।
सरकार ने बंदरों से निजात दिलाने के लिए 2003 के बाद किए प्रयासों का ब्योरा कोर्ट के समक्ष रखा। सरकार के शपथ पत्र के अनुसार बंदरों के नसबंदी आॅपरेशन के लिए वर्ष 2006 में टूटीकंडी में एक केंद्र खोल दिया था।