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बिजली एक्ट में संशोधन के खिलाफ उतरे कर्मी
बिजलीकर्मियों के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने बिजली एक्ट में विद्युत संशोधन विधेयक-2014 को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार के इस फैसले से राज्य के बिजली कर्मियों में खासा रोष है। इस के तहत विद्युत (संशोधन) विधेयक 2014 के अनुसार विद्युत अधिनियम-2003 में कई संशोधनों को मंजूरी प्रदान कर दी है।
इलेक्ट्रिसिटीइंप्लाइज के बैनर तले आंदोलन
राज्यबिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने इसको लेकर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ऑल इंडिया कॉडिनेशन कमेटी इलेक्ट्रिसिटी एवं इंप्लाइज के बैनर तले यह आंदोलन होगा। बीते सोमवार को कर्मचारियों ने इस को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। पूरे देश के इंजीनियर कर्मचारी इस का विरोध कर रहें हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि संशोधन का असर हिमाचल सहित देश के सभी राज्यों पर पड़ेगा। प्रस्तावित संशोधन को लागू करने की प्रक्रिया हालांकि अभी काफी लंबी है। केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। संशोधन के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि विद्युत क्षेत्र में सुधार होगा। देश में विद्युत क्षेत्र में प्रतियोगिता, परिचालन क्षमता बढ़ेगी और विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार आएगा। उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
कर्मचारियोंका तर्क निजीकरण बढ़ेगा
कर्मचारियोंका तर्क है कि इस से निजीकरण बढ़ेगा। यदि एक्ट में संशोधन होता है तो कई तरह के बदलाव बोर्ड में होंगे। बिजली वितरण संस्था से मैंटिनेंस राजस्व का काम अलग-अलग हो जाएगा। प्रस्तावित संशोधन का हिमाचल प्रदेश पर भी असर पड़ सकता है। इससे लोगों को महंगी बिजली मिल सकती है ऐसी आशंका जताई जा रही है। बिजली के संचारण और वितरण का कार्य बांट दिया जाएगा। यह सीधे तौर पर निजीकरण को बढ़ावा देने वाला फैसला है। इस से ठेकेदारी प्रथा को भी बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड करीब 2,000 करोड़ रुपए के घाटे में है।
जनता के हित की लड़ाई लड़ेंगे
हिमाचलप्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के महामंत्री हीरा लाल वर्मा ने कहा कि यूनियन संशोधन के खिलाफ है। आम जनता के हितों के लिए लड़ाई लड़ेंगे। दिल्ली में इस को लेकर दो रोज पूर्व धरना प्रदर्शन किया गया था। केंद्रीय कोआर्डिनेशन कमेटी के साथ मिलकर जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
कर्मचारियों का तर्क है कि एक्ट में संशोधन होता है तो कई