अफसरों ने काम ठीक होने पर किए बिल पास
बीएसएनएलकेसोलन-सिरमौर सर्किल में अनियमितता मामले में सीबीआई की विशेष अदालत बुधवार को फैसला सुनाएगी। कोर्ट ने मामले में बीएसएनएल के 4 अधिकारियों सहित 6 ठेकेदारों को दोषी करार दिया है। ठेकेदारों पर काम में अनियमितता का आरोप है। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्हें पता था काम सही तरह से नहीं हुआ है। इसके बावजूद ठेकेदारों को पैमेंट कर दी गई। स्पेशल जज सीबीआई कोर्ट भूपेश शर्मा की अदालत में इस केस पर फैसला होगा। कानूनविदों की माने तो मामले में आरोपियों को 1-7 साल तक की सजा हो सकती है।
19लाख में काम अवाॅर्ड
2008-09में बीएसएनएल के सोलन सिरमौर सर्किल में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम अवाॅर्ड हुआ था। 80 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई जानी थी। 6 ठेकेदारों को ये कार्य आबंटित किया गया। 19 लाख के करीब का ये काम था। टेंडर की शर्तों के मुताबिक फाइबर को बिछाने के बाद उसकी सीमेंट से पैकिंग की जानी थी। उसके बाद उसे मिट्टी से दबाया जाना था। लाइन बिछाने के लिए कितनी गहरी खुदाई होनी थी यह भी तय था। काम का निरीक्षण विभाग के एसडीई की देखरेख में होता है। जेटीओ बाद में मेजरमेंट बुक भरता है। इसी आधार पर पैमेंट जारी होती है। अधिकारियों को ये पता था कि काम में कोताही बरती है। इसके बावजूद काम की पैमेंट जारी कर दी गई।
ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का मामला 2009 का है। सोलन-सिरमौर सर्किल में बीएसएनएल ने आॅप्टिकल फाइबर लाइन बिछाई थी। ऑप्टिकल फाइबर बिछाने में अनियमितता की िशकायत सीबीआई से हुई। जांच में अनियमितता के सबूत मिले। जांच अधिकारियों ने सभी से पूछताछ की। साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने 2011 में पीसी एक्ट-1988 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद इसका चालान कोर्ट में पेश किया। इसमें मिलीभगत का आरोप है।
{ऐसे फंसे अधिकारी
बीएसएनएलके एसडीई मनमोहन सिंह, दयाचंद, जेटीओ एम. जितेंद्रा और आशुतोष डोबरियाल ने काम का निरीक्षण किया था। ये कर्मचारी सिरमौर सोलन सर्किल में तैनात थे। इनके निरीक्षण में ही ये काम हुआ। जेटीओ मेजरमेंट बुक भरता है। यानी काम सही हुआ है इसका निरीक्षण की रिपोर्ट इनके द्वारा तैयार की जाती है। इसके आधार पर ठेकेदार को पैमेंट की जाती है। एक्सेप्टेंस टेस्टिंग के बाद ही मेजरमेंट बुक भरी जाती है। मामले में शामिल छह ठेकेदारों में कमल सिंह धौल्टा, संजीव कुमार, भूपिंद्र मिन्हास, दिगंबर सिंह, सतीश