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शिक्षा बंद...

7 वर्ष पहले
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दबाव में सरकार रिटायर्डजज की अध्यक्षता में बनाई कमेटी: वीरभद्र

महंगीशिक्षालेने के लिए हिमाचल के छात्र तैयार नहीं है। इसको लेकर सोमवार को प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। एचपीयू सहित प्रदेश भर के कॉलेज कैंपस में छात्र आए तो जरूर, लेकिन उन्होंने कक्षाएं नहीं लगाईं। छात्र-छात्राएं कक्षाओं के बाहर बैठे रहे। जब उन्हें कक्षाएं लगाने के लिए प्रशासन के अधिकारियों और शिक्षकों ने कहा तो उन्होंने फीस बढ़ोतरी वापस लेने को कहा।

छात्र संगठन एबीवीपी और एसएफआई की ओर से गठित संयुक्त समन्वय समिति ने प्रदेश भर में शिक्षा बंद का आह्वान किया किया है। इसलिए प्रदेश भर के 90 सरकारी कॉलेजों में कक्षाएं नहीं लगी। छात्र संगठनों का कहना है कि आम छात्र भी उनसे जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक 25 सितंबर को एचपीयू प्रशासन ईसी की बैठक रखने जा रहा है। ऐसे में छात्रों की निगाहें ईसी पर टिकी हुई है। यदि बैठक में फीस वृद्धि को वापस लेने पर फैसला नहीं होता है ताे छात्र 26 सितंबर को शिमला में एक महारैली करेंगे।

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उग्र हो रहे छात्र आंदोलन के आगे आखिरकार राज्य सरकार आैर विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना ही पड़ा। फीस सहित अन्य सभी मामलों के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी एक महीने में रिपोर्ट सौंपेंगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि छात्र समुदाय के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने उनसे मिलने आए हिमाचल प्रदेश विवि आैर एनएसयूआई के शिमला जिला के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया। एनएसयूआई के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें जानकारी दी कि कुछ निश्चित मामलों में फीस में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। वीरभद्र ने प्रधान सचिव शिक्षा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक की।

एचपी यूनिवर्सिटी कैंपस में अभी भी तनाव बना हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से धारा 144 को अभी भी लागू किया गया है। जिसके चलते कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है। मुख्य गेट के सामने छात्रों के आईकार्ड चेक किए जा रहे हैं। पांच से अधिक छात्रों को एक साथ खड़े रहने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कैंपस को छावनी में तब्दील किया गया है।

जिन छात्राें का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है, वह भी इस