हिमाचल के लिए फायदममंद है जीएसटी
हिमाचल फायदे के बावजूद जीएसटी का करेगा सशर्त समर्थन
मजबूरी
इसे राजनीतिक मजबूरी की कहेंगे कि हिमाचल जीएसटी को अपने पक्ष में होने के बावजूद खुले रूप से समर्थन नहीं दे सकेगा। सरकार की आेर से इस पर सशर्त समर्थन ही दिया जाएगा। हालांकि कंज्यूमर स्टेट होने के नाते यह हिमाचल के लिए काफी लाभदायक है।
इससे हिमाचल को केंद्र से मिलने वाले हिस्से में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, लेकिन कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए फैसले के कारण इसे सशर्त ही समर्थन दिया जाना है। 19 फरवरी को जीएसटी के मसले पर एंपावर कमेटी की बैठक होनी है। इसमें जीएसटी के स्वरूप पर चर्चा होनी है, इसके साथ ही कांग्रेस शासित राज्यों की आेर से बदलाव करने के लिए अपना पक्ष दर्ज करवाया जाना है। जीएसटी बिल को पास करने के लिए केंद्र में पूरा जोर लगाया जा रहा है। कमेटी के नए अध्यक्ष की अध्यक्षता में पहली बार फिर से बैठक करवाई जा रही है। इसके लिए हिमाचल ने अपनी तैयारी कर ली है, लेकिन खुला समर्थन देने की बजाय पार्टी लाइन पर ही फैसला लिया है। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में बिना टैक्स का सामान ला रहे कारोबारियों पर नकेल कसी जा सकेगी। हिमाचल जैसे राज्य में हालांकि ऐसे मामले कम होते हैं, लेकिन टैक्स की चोरी फिर भी रहती है। इसे रोकने के लिए भी जीएसटी काफी मददगार साबित होगा।
वर्तमान में हिमाचल को टैक्स के माध्यम से 5200 करोड़ रुपए की आय होती है। इसमें एक हजार करोड़ रुपए की आय शराब की बिक्री से होती है। इसके अलावा वैट से लेकर अन्य तरह के टैक्स की आय से बाकी आय हिमाचल को मिलती है। जीसीएटी के लागू होने के बाद इममें काफी इजाफे की उम्मीद है।
क्यों फायदेमंद है हिमाचल के लिए
इसकेलागू होने के बाद टैक्स का हिस्सा सभी राज्यों में केंद्र के माध्यम से बांटा जाना है। कंज्यूमर राज्य होने के नाते हिमाचल के हिस्से टैक्स के रूप में ज्यादा राशि मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ पूरे देश में एक ही टैक्स की दर लागू होने के कारण आम ग्राहक को भी इससे लाभ होना है।