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हिमाचल को मिले 20 नए जन औषधि केंद्र

5 वर्ष पहले
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हिमाचलको20 नए जन औषधी केंद्र खोलने को मंजूरी मिल गई है। बीते सप्ताह दिल्ली में वीपीपीआई को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने बैठक के बाद राज्य को यह प्रस्ताव दिया है। सरकारी अस्पतालों में खुलने वाले इन नए केंद्रों पर सोमवार से औपचारिकताओं पर कार्य शुरू हो जाएगा। किन-किन सीएचसी या पीएचसी, सिविल अस्पतालों में इन्हें खोला जा सकता है। इसकी रूपरेखा भी फाइनल हो जाएगी। इनके खुलने से उन अस्पतालों में मरीजों को जैनेरिक दवाइयां सस्ते दामों पर मिल सकेगी। इन केंद्रों को रोगी कल्याण समितियों के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। वार्षिक योजना में बजट निर्धारित कर मरीजों को सस्ते इलाज की सुविधा पर कार्य होता है।

मरीजों को सस्ती दरों पर मिल रही दवाइयां

हरजिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों में इस समय करीब 12 जन औषधि केंद्र हैं। इसमें हमीरपुर, धर्मशाला, ऊना, मंडी, कुल्लू, सोलन, चंबा, आईजीएमसी शिमला, मेडिकल कॉलेज टांडा, दीन दयाल उपाध्याय शिमला िबलासपुर शािमल हैं। जन औषधि केंद्र खुलने से मरीजों को सस्ती दरों में दवाइयां उपलब्ध हो रही है।

सोमवार से इस पर कार्य होगा शुरू

^प्रदेशमें 20 नए जन औषधि केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। सोमवार से इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। ताकि यह जल्दी ही चयनित अस्पतालों में खोले जाएं। सर्जिकल आइटम यहां रखने को मंजूरी मिल गई है। इसकी करीब 100 प्रकार की दवाइयां रखी जा सकेंगी। मरीजों को ज्यादा सस्ती दवाइयां मिलें इस बारे दवाइयों का स्टाक गया है। रोहितठाकुर, नोडल अधिकारी जन औषधी केंद्र, हिमाचल

अब तक हैं 12 केंद्र

हरजिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों में इस समय करीब 12 जनऔषधि केंद्र चल रहे हैं। इनमें मेडिकल कॉलेज टांडा शिमला सेल के मुताबिक अच्छे स्तर पर हैं। इसके अलावा कुछ अस्पतालों में भी केंद्रों में प्रॉपर दवाइयां मिल रही हैं। लेकिन इस समय फार्मासिस्ट मिलने से तीन जिलों के जनऔषधि केंद्र बंद पड़े हैं। वैसे आरकेएस की गर्वनिंग बाॅडी की बैठकों में इन केंद्रों पर दवाइयों की खरीद पर फाइनल मोहर लगती है, लेकिन कई जगहों पर दवाइयों की प्रॉपर खरीद नहीं हो पा रही। इनमें हमीरपुर रीजनल अस्पताल का जन औषधि केंद्र भी शामिल है। ऐसे में सर्जिकल आइटम भी पहुंच पाएगी या नहीं यह बड़ा सवाल है।

}अब कम कीमतों पर सर्जिकल आइटम्स भी मिल सकेगी

}केंद्रीय मंत्रालय ने दी हरी झंडी

फायदा

इन केंद्रों पर अब तक जनरल जैनेरिक दवाइयां ही उपलब्ध हो पाती रही हैं। इस कारण यहां करीब 300 प्रकार की दवाइयां रखने का प्रावधान था, लेकिन अब यहां और ज्यादा दवाइयां सस्ती दर वाली जोड़ने का प्रावधान कर दिया है। यहां अब 450 प्रकार की दवाइयां रखी जा सकेंगी। जो नए निर्देश जारी हुए हैं उनके तहत इन केंद्रों पर सर्जिकल संबंधी आइटम भी बेची जा सकेंगी। जाहिर है कि एक ऑपरेशन को सरकारी अस्पतालों में बाहर से सामान लाने पर 2 से 4 हजार तक मरीजों को खर्च बैठ जाता है। लेकिन अब यहां सर्जिकल आइटम मिलने पर यह खर्चा एक हजार से भी कम हो सकता है। जिसका सीधा लाभ लोगों को आर्थिक तौर पर मिलेगा।

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