चांशल से शिमला काे मिलेगा 12 माह पानी
विधायक ने भी की है ठोस कदम उठाने की मांग
शहरमें जल संकट को देखते हुए विधायक सुरेश भारद्वाज ने भी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीलिया के मामले सामने आने के बाद शहर में अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई रोक दी गई है। इस योजना से करीब एक लाख की आबादी को पानी सप्लाई होता था। अब पानी बंद होने से गिरि, गुम्मा पेयजल योजना पर भार बढ़ गया है। सर्दी, गरमी में इन दोनों योजनाओं में भी पानी की किल्लत रहती है। ऐसे में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार अश्वनी के विकल्प को तलाशें या फिर गिरि और गुम्मा पेयजल योजनाओं में सुधार करें। जिससे कि शहर में आपूर्ति में सुधार हो सके।
100 करोड़ अनुदान की मांग
मेयर,डिप्टी मेयर ने पत्र में मुख्यमंत्री से नगर निगम को 100 करोड़ का अनुदान देने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि शहर में विशेषकर सड़क, गंदे पानी की निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की जरूरत है। इन सभी बुनियादी सुविधाओं का प्रयोग सिर्फ़ शिमला के लोग करते हैं, बल्कि वे सभी सैलानी भी करते हैं, जिनसे राज्य को अच्छा पैसा आता है। शिमला देश की सबसे पुराना नगर निगम में से एक है। इसी के मद्देनज़र शिमला में बुनियादी सुविधाओं के विकास की अधिक ज़रूरत है। इसके लिए राज्य बजट में 100 करोड़ रुपए का अनुदान का प्रावधान जरूरी है। उन्होंने पत्र में दो दिन चली मैराथन बैठक में नगर निगम के तहत आने वाले तीन विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को बुलाने पर ऐतराज जताया है।
सिटी रिपोर्टर| शिमला
शहरमें हर साल बढ़ते पेयजल संकट को दूर करने के लिए नगर निगम ने सरकार से ठोस एवं स्थायी समाधान की मांग की है। निगम के मेयर संजय चौहान और डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर ने इस बारे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिखा है। मेयर और डिप्टी मेयर ने कहा कि शहर की जनसंख्या दो लाख से पार हो चुकी है, लिहाजा, अब अंग्रेजों के शासनकाल में बनी पेयजल योजनाओं से शहर में पर्याप्त आपूर्ति करना मुमकिन नहीं रह गया है। सर्दी और गर्मी में जब इन योजनाओं में पानी की कमी हो जाती है, तो लोगों को पानी के लिए दूसरे या तीसरे दिन ही पानी नसीब हो पाता है। लोगों को जल संकट से हमेशा के लिए राहत दिलाने को प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। यह तभी संभव हो सकता है कि जब यहां के लिए एक बड़ी योजना बनेगी। उन्होंने पत्र में चांशल प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने काफी पहले इसके बारे में चरचा शुरू की थी, मगर योजना फाइलों में ही दफन हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस योजना को प्राथमिकता से लें और वर्ष 2016-17 के प्लान में इसको शामिल करे। चांशल से शिमला के लिए बारह मास पानी की आपूर्ति की जा सकेगी। यह योजना हर लिहाज से बेहतर तो है ही, साथ ही स्वच्छ जल भी लोगों को नसीब होगा।