प्रशासन बॉयोमीट्रिक मशीन लगाने को तैयार, टीचर कर रहे विरोध
ओवर टाइम का किया जाएगा बहिष्कार
शिक्षकोंऔर कर्मचारियों का कहना है कि बॉयोमीट्रिक्स लगाने का फैसला यदि विवि प्रशासन वापस नहीं लेता है तो वह आंदोलन करेंगे। वह ओवर टाइम काम का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि शिक्षकों और कर्मचारियों पर फैसले थोपना प्रशासन पर महंगा पड़ सकता है। विश्वविद्यालय में छात्र हित में कर्मचारी दिन-रात कार्यालयों में बैठ कर परीक्षा से संबंधित कार्य और समय पर परिणाम घोषित करने जैसे कार्य करते हैं।
अभी तक यहां प्रस्तावित हैं मशीनेंं
ईसीकी मंजूरी के बाद बॉयोमीट्रिक मशीनें प्रशासनिक भवन परिसर में दो, इक्डोल, कुलपति कार्यालय, आर्ट्स ब्लॉक, साइंस ब्लॉक, यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (एमबीए विभाग) चीफ वार्डन और डीएस कार्यालय के साथ ही छात्रावासों में भी मशीनें लगाई जानी हैं। इसके अलावा वह विभाग भी इसमें कवर किए जाएंगे, जिसमें कर्मचारियों और शिक्षकों की संख्या कम है। प्रशासन का मानना है कि यदि उन्हें लगता है कि बॉयोमीट्रिक से पूरे विभाग कवर नहीं हो रहे हैं, तो बॉयोमीट्रिक मशीनें आैर ज्यादा भी लगाई जा सकती हैं। इसके लिए जो कमेटी गठित की गई थी, वह अब यह भी देख रही है कि कम से कम मशीनें लगाकर, अधिक से अधिक विभागों को कवर किया जाए।
विवि प्रशासन वापस ले फैसला
प्रदेशविश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) का कहना है कि प्रशासन अपना फैसला वापस लें। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रशासन को इसके परिणाम भुगतने होंगे। हपुटवा के अध्यक्ष प्रो. शशिकांत लोमेश का कहना है कि शिक्षक रिसर्च वर्क अन्य कार्य के चलते व्यस्त होते हैं। ऐसे में कैसे वह बॉयोमीट्रिक में हािजरी लगा सकते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को इस तरह के फैसले वापस ले लेने चाहिए। इस तरह के आदेश थोपना ठीक नहीं है।
एजुकेशन रिपोर्टर| शिमला
एचपीयूनिवर्सिटी में एक ओर जहां प्रशासन बॉयोमीट्रिक मशीन लगाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी आेर शिक्षक इसके विरोध में गए हैं। ऐसे में बॉयोमीट्रिक मशीन लगाने के विरोध में कर्मचारी शिक्षक एक हो गए हंै।
जल्द ही इस मामले में आंदोलन किया जा सकता है। कर्मचारी और शिक्षक मशीन को लगाने के बिलकुल भी पक्ष में नहीं है। विवि प्रशासन कर्मचारियों और शिक्षकों पर नकेल कसने के लिए इस तरह की तैयारियां कर रहा है, लेकिन शिक्षक इसके पक्ष में नहीं है।
चारगैर शिक्षक कर्मचारी संगठन एकजुट
बतायाजा रहा है कि एचपीयू के चार गैर शिक्षक कर्मचारी संगठन इस मामले में एकजुट है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने इस बारे में अपना विरोध दर्ज किया है।