रिंपोंछे की पुनर्जन्म की कामना की
बौद्धधर्मके नीमा संप्रदाय के प्रमुख लामा ताकलुंग सेतुल रिंपोंछे की मुत्यु के बाद 49वें दिन की पूजा में देश विदेश से अनुयायी शामिल हुए। पंथाघाटी स्थित दोर्जेडक मठ में बुधवार को पूजा हुई। इस पूजा में बौद्ध भिक्षुओं और अन्य काफी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
बौद्ध धर्म के अनुसार आत्मा शरीर से 49 दिन में अलग होती है। इसके चलते पिछले 49 दिनों से तिब्बती बौद्ध भिक्षु पूजा अर्चना कर लामा के पुनर्जन्म की कामना कर रहे थे। गौरतलब है कि बौद्ध धर्म के ग्यालुक एकाग्यू सक्या सेतुल रिंपोंछे नीमा संप्रदाय के प्रमुख थे। सेतुल रिंपोछे लगभग 90 वर्ष के थे और उन्हें तिब्बति धर्मगुरु दलाई लामा ने नीमा संप्रदाय का प्रमुख घोषित किया था। 49 दिन पूर्व इसी मठ में उनका निधन हो गया था। गौरतलब है कि दोर्जेडक मठ के बौद्ध भिक्षु उनके पार्थिव शरीर को एक वर्ष के लिए संजोए रखना चाहते हैं ताकि अनुयायी उनके अंतिम दर्शन कर सके। मठ के बौद्ध भिक्षु दोरजे सांगपो ने कहा कि उनके अंतिम दर्शन के लिए देश विदेश से कई लोग शामिल हुए। इससे पहले दिन मंगलवार को लोसर पर्व के अवसर पर भी यहां केवल पूजा अर्चना की गई। इसमें काफी संख्या में समुदाय के लोगों ने इसमें भाग लिया।
पंथाघाटी बौद्ध मठ में आयोजित शोक सभा में भाग लेते बौद्ध धर्म के अनुयायी।