नौतोड़ भूमि धारकों को सुप्रीमकोर्ट से िमली राहत
हिमाचलमें नौतोड़ भूमिधारकों को मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। इससे प्रदेश के लगभग दस हजार परिवारों को राहत मिलेगी। इस फैसले के बाद अब हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मंडलीय आयुक्तों के कार्यालयों में चल रहे मामले भी रुक जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मंडलीय आयुक्तों के कार्यालयों से नौ तौड़ भूूूमि धारकों को नोटिस दिए थे।
शिमला जिले में तो एक से दो बार सुनवाई भी हो चुकी है। ऐसे ही मंडी आैर कांगड़ा जिले के मंडलीय आयुक्तों के कार्यालयों में भी सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। राज्य में 1970 में जिन परिवारों के पास भूमि कम थी, उन्हें सरकार ने भूमि दी थी। इसे नौतोड़ का नाम दिया था। इसके लिए राज्य में हिमाचल प्रदेश नौ तौड़ एक्ट 1968 बनाया था। जिनकी सालना आय 2000 रुपए से कम थी, उन्हें इसके लिए पात्र माना था। इसके बाद प्रदेश हाईकोर्ट ने इसमें आदेश दिए थे कि नौतोड़ के तहत दी भूमि के वापस लिया जाए। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद इस फैसले को सरकार ने सुुप्रीमकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया था। इसमें राजस्व विभाग की आेर से पूरा मसौदा तैयार कर सुप्रीमकोर्ट में सरकार की पैरवी के लिए सौंपा गया था।
राज्य सरकार ने 1968 के एक्ट के तहत तत्कालीन नियमों के तहत ही लोगों को नौतोड़ जमीन दी थी। इसमें पांच बीघा जमीन दी गई थी। इसके बाद अब साढ़े चार दशक के बाद इस भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया चल रही थी।
मंडलीय आयुक्तों ने शुरू कर दी थी कार्रवाई
हाईकोर्टकेआदेशों के प्रदेश सरकार ने नौ तौड़ के मामलों पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसमें भू मालिकों को नोटिस जारी करने के बाद पक्ष रखने का मौका दिया गया था। शिमला मे मार्च महीने में अगली सुनवाई तय की थी। इस बीच नौ तौड़ के तहत जिन लोगों को भूूमि दी गई थी, उनके प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समक्ष अपना पक्ष रखा था।