पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • देरी से लागू होगी इको टूरिज्म पालिसी

देरी से लागू होगी इको टूरिज्म पालिसी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हिमाचलके जंगलों में आकर प्रकृित की बीच रहकर रहने के लिए सैलानियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। प्रदेश सरकार की इको टूरिज्म की पालिसी फोरेस्ट कंजरवेशन एक्ट के पेंच में फंस गई है। इसके लिए हिमाचल सरकार पहले दिल्ली से मंजूरी लेगी। इसके बाद ही इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार ने वनों में पर्यन को बढ़ावा देने के लिए इको टूरिज्म पालिसी का निर्माण किया था। इसके तहत वन भूमि पर पर्यटन गतिविधियां शुरू करने के लिए भूमि को लीज पर दी जानी है। राज्य में वन भूमि को सरकार फोरेस्ट क्लीयरेंस के बगैर गैर वनीय इस्तेमाल के लिए केंद्र से मंजूरी लेनी पड़ती है।

इस पालिसी को अब केंद्र से मंजूरी के बाद ही लागू किया जा सकेगा। इस पालिसी का निर्माण स्थानीय युवाआें को रोजगार के साथ सैलानियों को हिमाचल की सुंदरता देखने का मौका देने के लिए किया गया था।

मंजूरीके बाद अटका मामला

इसमामले में एक बार तो कैबिनेट भी मंजूरी दे चुकी है। पालिसी के मंजूर होने के बाद इसके नियम तैयार करने के समय पूरे मामले पर गहनता से चर्चा के बाद इसे दिल्ली भेजने के फैसला लिया है। अब दिल्ली से वन भूमि गैर वनीय इस्तेमाल के लिए लीज पर देने की मंजूरी मिलने के बाद ही सरकार इसे प्रदेश में दोबारा से लागू कर सकेगी।

क्याहै इको टूरिज्म पालिसी

राज्यमें वन क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अस्थाई ढांचे के निर्माण की अनुमति दी जाती है। इसमें सैलानियों को प्राकृति के बीच में रहने का मौका मिल सके, इस मंशा से सरकार ने पालिसी तैयार की थी, लेकिन हर बार मंजूरी अस्थाई ढांचे की मिलती है आैर निर्माण स्थाई ढांचे का किया जाता है।

पहले भी विवादित रही है इको टूरिज्म पालिसी

राज्यमें सरकार की इको टूरिज्म पालिसी पहले भी विवादों रही है। पूर्व सरकार के समय में बनी पालिसी के तहत लोगों को अनुमति अस्थाई ढांचे की मिली थी, इसके बावजूद वन भूूमि पर स्थाई ढांचों का निर्माण कर सीधे तौर पर नियमों की उल्लंघना की। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद यह मामला उठा, लेकिन बिना किसी परिणाम के ही खत्म हो गया।

खबरें और भी हैं...