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पीलिया पीड़ितों को मुआवजा दे सरकार

5 वर्ष पहले
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पूर्वमुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि पीलिया के प्रकोप से निपटने में सरकार पूरी तरह से असफल साबित हुई है। इस रोग से निपटने में प्रयासों की कमी सरकारी लापरवाही की वजह से अब यह रोग महामारी का रूप लेता जा रहा है। आधा शिमला शहर इसकी चपेट में है। सोलन, सिरमौर और मंडी में भी पीलिया के मामले सामने आने से हड़कंप मचा है। नवंबर महीने की शुरूआत से पीलिया के मामले सामने आए थे, समय पर कदम उठाए जाने का खामियाजा लोग आज तक भुगत रहे हैं। सरकार की इस निष्क्रीयता की वजह से दिसंबर तक पीलिया पूरे शिमला में फैला है। इस कारण कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने कहा कि जांच ऐजेंसियों की जांच में साफ हो चुका है कि शिमला और सोलन में फैले इस पीलिया के लिए हैपेटाइटिस-ई जिम्मेदार है। यह सीवरेज में पाया जाता है। नगर निगम और आईपीएच विभाग की कोताही की वजह से सीवरेज मिला पानी पीने के लिए लोगों को मजबूर होना पड़ा। स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने के दोनों की संयुक्त जिम्मेवारी है। अपनी इसी जिम्मेदारी में पूरी तरह से असफल होने के बाद अब यह उनका फर्ज है कि पीड़ित व्यक्तियों के स्वास्थ्य संबंधित सभी खर्चों को पूरी तरह से वहन किया जाए। सभी पीड़ितों को सरकार उचित मुआवजा प्रदान करें।

पीलिया के बाद स्वाइन फ्लू की दस्तक

उन्होनें कहा केवल पीलिया बल्कि स्वाइन फ्लू प्रदेश में दस्तक दे चुका है। मंडी में स्वाइन फ्लू के दो मामले सामने आए हैं। साधारण नागरिक के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता का उदाहरण और क्या हो सकता है कि धरातल स्तर पर कदम उठाए जाने के बजाए सरकार सचिवालय स्तर पर अधिकारियों के साथ बैठकों में उलझी है।

कौन संभाल रहा विभाग जानकारी तक नहीं

उन्होंनेकहा कि आईपीएच सरकार का एक महत्वपूर्ण विभाग है। प्रदेश की आईपीएच मंत्री बीमार चल रही है। इस विभाग की जिम्मेेवारी कौन संभाव रहा है। इससे संबंधित कोई भी जानकारी नहीं है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में जब स्थितियों पर नियंत्रण अति आवश्यक है, सरकार का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार निराशाजनक है।

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