प्रदेश की पंचायतंे बनेंगी स्मार्ट
स्मार्टसिटी के बाद अब प्रदेश की पंचायतों को भी स्मार्ट बनाया जाएगा। आईएसओ सर्टिफिकेट पाने के लिए सरकार ने प्रदेश में स्मार्ट पंचायतों का चयन शुरू कर दिया है। सरकार ने पंचायती राज विभाग को प्रदेश की ऐसी पंचायतों का नाम भेजने को कहा है जो पूरी तरह हाईटेक हो चुकी है और लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करवा रही हैं। इसमें सरकार जानना चाह रही है कि उनके आय के साधन क्या है, वहां पर कूड़े कचरा का प्रबंधन किस तरह किया जाता है, ग्राम सभा की बैठक में पर्यावरण सरंक्षण संबंधी कौन से निर्णय लिए जाते हैं, लोगों के ज्ञान को बढ़ाने के लिए क्या गांव में नॉलेज सेंटर स्थापित किया गया है, आधुनिक रिकार्ड रूम स्थापित किया गया है, कर्मचारियों को बैंक के माध्यम से वेतन की अदायगी होती है या नहीं, लोगों को कल्याणकारी सूचनाएं देने के लिए वाॅयस का इस्तेमाल किया जाता है आदि कई तरह की सूचनाएं देने को कहा है।
सर्टिफिकेट के लिए जरूरी शर्तें
{पंचायतेंस्वावलंबी हो, उसके अपने आय के साधन होने चाहिए {पंचायतें साफ सुथरी हो, इसके लिए पंचायतों में कूड़े कचरे का उचित प्रबंधन होना चाहिए {हर ग्राम सभा में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव पास हाेने चाहिए और उन पर काम होना चाहिए {पंचायतों का आधुनिक रिकार्ड रूम होना चाहिए, इसके लिए जरुरी है पंचायतों को ऑनलाइन कंप्यूटर की सुविधा से जुड़ा होना { पंचायतों में तैनात कर्मचारियों को बैंकिंग के माध्यम से वेतन की अदायगी करना { सरकार की सारी कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना ताकि वह हर स्कीम से रु-ब-रु हो सकें।
केरल की तर्ज पर हिमाचल भी दौड़ में
सरकारकेरल की तर्ज पर हिमाचल की पंचायतों को भी आईएसअो सर्टिफिकेट प्रदान करवाना चाह रही है। अधिकारियों का तर्क है कि यहां पर भी कई पंचायतें अच्छे से काम कर रही हैं। उन्हें आगे लाने के लिए और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए विभाग को ऐसी पंचायतों की सूची तैयार करने को कहा गया है जो स्मार्ट वर्क कर रही हैं। सरकार उन पंचायतों का नाम आईएसअो सर्टिफिकेशन के लिए आगे भेजेगी।
क्या है आईएसओ
आईएसओ(इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर स्टेंडर्डाइजेशन) एक निजी संस्था है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। 170 देश इसके सदस्य हैं। इसमें भारत भी शामिल है। मध्य प्रदेश में भी कई कंसलटेंसी कंपनी इसके लिए कार्य करती हैं, जो किसी भी ऑफिस द्वारा वहां आने वाले लोगों को दी जा रही सेवाओं सुविधाओं की जांच कर रिपोर्ट तैयार करती है। रेटिंग/ग्रेडिंग के हिसाब से आईएसओ से प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। यह प्रमाण पत्र तीन वर्ष के लिए होता है। हर वर्ष इसे रिनुवल किया जाता है।