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हर दिन 1.4 करोड़ कैसे खर्चेगा िनगम, 50 दिन का बचा समय

5 वर्ष पहले
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2007में राजधानी के िवकास के िलए 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट जेएनएनयूअारएम के तहत मंजूर हुअा था। लेकिन इस प्रोजेक्ट से भी शहर को फायदा नहीं हुअा क्योंिक यहां पर सरकार और िनगम के अिधकारी सुस्त रहे और िसर्फ विकास पर राजनीति होती रही। इस बार अम्रुत योजना के लिए मिली पहली किश्त की हालत भी ऐसी ही दिख रही है। केंद्र ने राजधानी को अम्रुत योजना की पहली किश्त के लिए अक्टूबर 2015 में 52 करोड़ मंजूर किए हैं।

इसे 31 मार्च तक खर्च करना है, लेकिन सरकार ने इसे कैसे खर्च करना है, इसकी डीपीआर तैयार करने के िलए अभी तक कंसल्टंट की तैनाती भी नहीं की है। सरकार आैर नगर निगम अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं िक इन पैसों को कहां और कैसे खर्च किया जाना है।

योजना की डीपीआर तैयार करने के लिए जो कंसल्टेंट नियुक्त करना है उसे केंद्र ने अपनी गाइडलाइन में अनिवार्य किया है। केंद्र सरकार ने एसएलटीसी (स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी) को पीडीएमसी हायर करने को कहा है। इसके बिना योजना की डीपीआर तैयार नहीं होगी। योजना की डीपीआर को प्रभावशाली बनाने के लिए केंद्र सरकार ने पीडीएमसी की नियुक्ति को अनिवार्य किया है जो अभी तक नियुक्त नहीं हो पाया है। इधर 52 करोड़ के बजट को योजनाबद्ध तरीके से खर्च करने के लिए निगम के पास डेढ़ माह का समय बचा है।

योजना की डीपीआर तैयार करने के लिए नगर निगम द्वारा सलाहकार की नियुक्ति के लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जानी है जो एक लंबी प्रक्रिया है। निगम कब टेंडर करेगा, कब टेंडर की प्रक्रिया सिरे चढ़ेगी, टेंडर में कोई आवेदन मिलेगा या नहीं इसका अभी तक कोई अता पता नहीं है। ऐसी कई अटकले हैं जिससे योजना संकट में है। हालांकि अधिकारियों का तर्क है कि कंसल्टंट के लिए केंद्र सरकार ने कोई टाइमलाइन तय नहीं की है, लेकिन अगर निगम समय पर सलाहकार की नियुक्ति कर लेता तो योजना की डीपीआर अच्छे तरीके से बन पाती।

^सरकार ने अभी कंसल्टंट हायर करने की परमिशन दी है। शीघ्र इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा जारी बजट 31 मार्च से पहले खर्च कर दिया जाएगा। प्रशांतसरकैक, सहायक आयुक्त नगर निगम शिमला

यह कार्य सूची में

तीन करोड़ रुपए की लागत से बल्क वाटर मीटर, 50 लाख रुपए की लागत से पेयजल पाइप लाइन में लीकेज की समस्या को दूर करना, सात करोड़ की लागत से पेयजल योजनाओं में सुधार लाना, पांच करोड़ रुपए की लागत से व्यवसायिक घरेलू मीटर लगाना, प्राकृतिक जल स्रोतों के रख रखाव पर एक करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। सभी 25 वार्डों में वाटर एटीएम के लिए 2 करोड़ का प्रोजेक्ट, 10 करोड़ की लागत से शहर में सीवरेज की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना है। छह करोड़ की लागत से शहर नई सीवरेज लाइन और एसटीपी का निर्माण करना, 50 लाख की बर्फ हटाने की मशीन खरीदना, 4.86 करोड़ रुपए की लागत से शहर में पार्किंग का निर्माण करना, 1.20 करोड़ रुपए की लागत से पार्कों को स्तरोन्नत करने जैसे कई कार्य शामिल है।

50 िदन में अाएंगे 12 सरकारी अवकाश भी

इसवित्तीय वर्ष के लिए महज 50 दिन ही बचे हैं। ऐसे में 52 करोड़ की राशि खर्च करने के लिए उनके पास महज 50 दिन है। इसमें करीब 12 सरकारी अवकाश भी हंै, इन्हें भी छोड़ दें तो सरकारी अमले को हर दिन एक करोड़ की राशि खर्चनी होगी। इसमें टेंडर कॉल करने की अवधि में अलग समय लगना है, यह पहले ही तय है।

16 प्रोजेक्टों के लिए मंजूर हुई है यह राशि

अम्रुतयोजना के लिए केंद्र सरकार ने शिमला को तीन साल के लिए 187.75 करोड़ रुपए मंजूर किए है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2015-16 के लिए प्रोजेक्ट की 52.94 करोड़ की पहली किश्त जारी कर दी है। यह पैसा 16 विभिन्न कार्यों पर खर्च किया जाना है। अम्रुत योजना में जिन 16 कामों की सूची तैयार की गई है।

{पहले भी जेएनएनयूआरएम के तहत मिले बजट को गंवा चुका है शिमला

{राशि मंजूर होने के चार माह बाद भी अभी तक कंसल्टंट ही िनयुक्त नहीं

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