• Hindi News
  • Chi Kdeshwar God Chef Proceeded To Nagarkot

नगरकोट के लिए रवाना हुए चिखड़ेश्वर देवता महाराज, भक्तों की उमड़ी भीड़

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ठियोग. ठियोग के प्रसिद्ध देवता चिखड़ेश्वर महाराज रविवार सुबह ना बजे अपनी देवठी से कांगड़ा जिला में नगरकोट धाम यात्रा के लिए रवाना हो गए। इस मौके पर देवता के हजारों कलैणों ने देवता महाराज की सीमा बांदरू तक पहुंचकर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। इससे पूर्व इस यात्रा में देवता के साथ रहने वाली देवता की बहन स्वरूप देवी जयेश्वरी जैस स्थित अपनी देवठी से सुबह बांदरू पहुंची और इस यात्रा में शामिल हो गईं।
बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तगण
देवी को विदा करने के लिए भी बड़ी संख्या में देवी के कलैणें और कारदार यहां पहुंचे थे। इस यात्रा में देवता महाराज के साथ 111 कारदार और कलैणें भी पैदल यात्रा कर रहे हैं। देवता चिखड़ेश्वर महाराज के साथ देवता जदराई भी साथ रहेंगे। देवता प्रमुख परिवार के सदस्य अधिवक्ता महेन्द्र झराईक ने बताया कि यह यात्रा 12 सालों के बाद हो रही है। देव पंरपरा के अनुसार इतने अंतराल के बाद देवता अपनी शक्ति प्राप्त करने कांगड़ा की देवी ब्रजेश्वरी में मंदिर में जाते हैं और अपने साथ देवी की शक्ति को लाकर मंदिर के शीर्ष पर स्थापित किया जाता है।
रविवार को बसंतपुर में रूकेंगी यात्रा
रविवार शाम को देवता की यह पैदल यात्रा क्यारटू होते हुए बसंतपुर तक होगी। सोमवार को यहां से देवता की यह यात्रा मांगू तक चलेगी। इसी प्रकार घुमारवीं, नदौन, ज्वालाजी आदि होते हुए 10 तय स्थानों पर रात्रि वित्राम के बाद देवता 24 फरवरी को ब्रजेश्वरी मंदिर कांगड़ा पंहुचेंगे। वहां पर 25 को देवता का स्नान व पूजा का कार्यक्रम होगा। उसी दिन वापिसी यात्रा शुरू होगी और उसी रूट पर पैदल यात्रा करते हुए 4 मार्च को देवता अपने धाम लौट आएंगे। इस यात्रा में देवता के गुर, पुजारी, भंडारी, देवता कमेटी प्रमुख सहित कई कारदार यात्रा पैदल यात्रा कर रहे हैं।
5 मार्च को चिखड़ में देवता की बढ़ात्तर का आयोजन
5 मार्च को चिखड़ में देवता की बढ़ात्तर होगी। इसी दिन देवता के साथ आई देवी ब्रजेश्वरी की स्थापना मंदिर के शीर्ष पर की जाएगी।इस देव कार्यक्रम में 8 से 10 हजार लोग शामिल होंगे। देवता की इस यात्रा में देवी जयेश्वरी के साथ भी 11 कारदार व कलैणें पैदल यात्रा कर रहे हैं। देवी ज्येश्वरी इस यात्रा के बाद एक दिन देवता चिखड़ेश्वर की महमान रहेंगी और 6 मार्च को वापिस अपनी देवठी लौट जाएंगी।