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पीलिया मामले की जांच को बने आयोग, हाईकोर्ट के जज होंगे अध्यक्ष

5 वर्ष पहले
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शिमला. भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने पीलिया के मामले में जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग की है। आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के जज होने चाहिए तभी मामले की निष्पक्ष जांच संभव है। बुधवार को प्रेसवार्ता में विधायक ने कहा कि अभी तक मामले में जो कार्रवाई हुई है, वह काफी नहीं है। अश्वनी खड्ड से जो दूषित पानी सप्लाई किया गया, उसमें आईपीएच ही नहीं, बल्कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी बराबर का दोषी है।
एमएसी ने आंखें मूंद कर उसे वितरित किया
आईपीएच ने पीलिया सप्लाई किया और एमएसी ने आंखें मूंद कर उसे लोगों को वितरीत किया। वहीं प्रदूषण बोर्ड सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित रहा। जबकि बोर्ड को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि शहर में दो माह से पीलिया का प्रकोप है। इससे आधा दर्जन लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं और लगभग 15 हजार लोग इसकी चपेट में आए हैं। अभी भी पीलिया थमा नहीं और अस्पतालों में लगातार मरीज पहुंच रहे हैं, मगर सरकार इसको लेकर अभी तक गंभीर नहीं है। अगर सरकार गंभीर होती, तो शहर में पीलिया पर अकुंश लग गया होता। पीलिया मामले को वैसे डिजास्टर के तौर पर लेना चाहिए था, पर सरकार इसे कैजुअली तौर पर ही ले रही है।
पीलिया पर अंकुश नहीं है
विधायक ने कहा कि सरकार स्वयं मान रही है कि पीलिया का प्रकोप 15 फरवरी तक रहेगा। लिहाजा, शहर में पीलिया पर अभी अकुंश नहीं है। उन्होंने मांग की कि स्कूलों में 10 दिन की छुटि्टयां घोषित की जाए, ताकि बच्चे पीलिया की चपेट में न आएं। वहीं उन्होंने मांग की कि जो कर्मचारी और अधिकारी पीलिया की चपेट में आए थे, उनको स्पैशल लीव दी जाए।
विधायक ने कहा कि पीलिया शिमला के अलावा अब सोलन और सिरमौर जिले को भी अपनी चपेट में ले चुका है। अब यह मामला अकेले शिमला का नहीं रह गया है। आने वाले विधानसभा सत्र में तीन जिलों के विधायक इस मामले को लेकर सरकार को घेरेंगे और इस गंभीर मामले में बरती लापरवाही को लेकर जवाब मांगा जाएगा।
मृतकों के आश्रितों को दिया जाए मुआवजा
विधायक ने सरकार से मांग की कि शहर में पीलिया से अब तक जिन लोगों की मौत हुई है, उनके आश्रितों को कम से कम पांच लाख रुपए बतौर मुआवजा दिया जाए। साथ ही पीलिया की चपेट में आकर जो लोग अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, उनका इलाज मुफ्त हो और टेस्ट की भी मुफ्त सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की लैब में एलएफटी टेस्ट की कोई सुविधा ही नहीं है। यह टेस्ट मरीजों को एसआरएल लैब या फिर अन्य निजी लैब में करवाना पड़ता है। जहां पर टेस्ट के 110 से लेकर 250 रुपए तक वसूल किए जाते हैं।
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