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प्रशासन गंभीर होता तो न फैलता पीलिया, जिला उपायुक्त ने बनाई कमेटी

5 वर्ष पहले
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शिमला. शहर में पीलिया फैलने का दोषी एक नहीं बल्कि इसमें हर अफसर का हाथ दिख रहा है। जिला प्रशासन का हालांकि पानी की सप्लाई में कोई रोल नहीं है, लेकिन असलियत देखे तो यह भी पीलिया से जूझ रहे लोगों का दोषी है। दरअसल, पिछले साल 27 अप्रैल को जिला स्तरीय शिकायत निवारण कमेटी की बैठक में मल्याणा सीवरेज प्लांट से सीवर छोड़ने का मामला उठा था। इस पर प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि प्लांट से छोड़े जा रहे पानी में कोई सीवर नहीं है।
बनाई गई कमेेटी
इतना ही नहीं बोर्ड ने प्लांट से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए पाइप भी डलवाई है। कमेटी के सदस्य बोर्ड के अधिकारी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और मांग कि कमेटी बनाई जाए, जो कि मौके का दौरा करेगी।
मांग पर जिला उपायुक्त की ओर से कमेेटी बनाई गई। इसमें शिकायत निवारण कमेटी के सदस्यों के अलावा एडीएम, आईपीएच विभाग के अधिकारी शामिल रहे। जुलाई के पहले हफ्ते में कमेटी ने मल्याणा सीवरेज प्लांट का दौरा किया और पाया कि प्लांट से छोड़ी गंदगी खुले में बह रही है।
रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी गई
प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी ने जिस पाइप की बात कही थी, वह वहां नहीं थी। दौरे के बाद कमेटी की ओर से रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी गई। मौके की नेगेटिव रिपोर्ट के बावजूद जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता नहीं समझी। अश्वनी खड्ड के पानी में सीवर मिल रहा है, इसके बारे में जिला प्रशासन ने न तो नगर निगम को अलर्ट किया और न ही आईपीएच पर शिकंजा कसा। शहर में पानी की आपूर्ति नगर निगम करता है और जिस सीवर प्लांट की गंदगी खड्ड में मिल रही थी, वह आईपीएच का है।
बड़ी लापरवाही का मामाला
अगर जिला प्रशासन समय रहते गंभीर कदम उठा लेता तो आज शहर में पीलिया फैलने की नौबत ही न आती। यह प्रशासनिक अधिकारियों की ही लापरवाही है कि लोग अश्वनी खड्ड का दूषित पानी पीते रहे और वे पीलिया की चपेट में आ गए। इस मामले में जब उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मामला पुराना है और उन्हें याद नहीं है। वे फाइल देखकर ही बता पाएंगे।
कमेटी ने रिपोर्ट पहले दी थी
प्रशासन की ओर से गठित कमेटी में जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति के सदस्य चमियाणा निवासी आरके शांडिल भी थे। उन्होंने बताया कि प्रदूषण बोर्ड ने बैठक में जो दावे किए थे, वे मौके के दौर पर हवाई निकले थे। खुले में छोड़े गए जिस सीवर के नजदीक पशु तक नहीं जाते थे, वह अश्वनी खड्ड के पानी में मिल रहा था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी और आगे की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी।
निगम के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं
निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि प्रशासन की ओर से गठित की कमेटी के दौरे के दौरान मल्याणा प्लांट का सीवर अश्वनी खड्ड में मिलने की बात सामने आई थी, इसके बारे में निगम को जानकारी नहीं है। न ही जिला प्रशासन की ओर से इस बारे में अलर्ट किया गया। अगर प्रशासन अलर्ट करता तो निगम समय रहते पानी पर रोक लगा लेता और फिर पीलिया फैलने के बाद पानी रोकने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
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