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घर में बंटाती है मां का हाथ, खेतों में भी करती है काम, पढ़ाई में आती है टॉप

8 वर्ष पहले
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जुन्गा/ शिमला ।दरअसल प्रियंका जैसी बेटियों की उपस्थिति से ही यह संसार सुंदर है। इस बिटिया की कहानी संघर्ष लग्न और विचार से भरपूर है, तभी तो घर के कार्य में मां का हाथ बंटाने से लेकर खेतों में अन्न उपजाने के बाद पढ़ाई में मन लगाने से उपजी सफलता ने ही उसके परिवार का नाम रोशन किया है।

टिक्कर के साथ लगते छोटे से गांव कोहान में एक किसान परिवार जगदीश शर्मा के घर पैदा हुई प्रियंका शर्मा ने बोर्ड की आट्र्स संकाय की परीक्षा में कड़ी मेहनत और लग्न से प्रदेश भर के स्कूलों में दसवां हासिल किया। प्रियंका की कहानी बड़े-बड़े नामी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों पढ़ रहे बच्चों से अलग है।

प्रियंका रोजाना सुबह चार बचे उठकर पढ़ाई करती है उसके बाद घर के जरुरी कामों में मां का हाथ बंटाने से लेकर पैदल ही रोजाना स्कूल के लिए 6 किलोमीटर का सफर तय करती है। यहां भी सीधे सरल स्वभाव और कड़ी मेहनत से प्रियंका हर स्कूल में हर टीचर की चहेती है। यह टीचरों की ही मेहनत का नतीजा था कि ट्यूशन न पढऩे के बावजूद आट्र्स संकाय में प्रियंका मेरिट लिस्ट में रही।

मंगलवार को जब प्रियंका अपनी माता जो पेशे से गृहिणी गीता शर्मा और और पिता जगदीश दत्त शर्मा के साथ दोपहर बाद करीब 1.30 बजे टीचरों से मिलने पहुंची तो स्कूल परिसर में ही छात्राओं को प्रियंका को गोद में उठाकर मेरिट में आने पर बधाई दी। इस अवसर पर छात्राओं में उत्साह देखे ही बन रहा था। स्कूल की प्रिंसिपल मीनाक्षी शारदा ने भी प्रियंका प्रियंका को मेरिट लिस्ट में आने पर गले लगाकर बधाई दी।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए प्रियंका ने अपनी कामयाबी का सारा श्रेय माता-पिता सहित स्कूल की प्रिंसिपल, जियोग्राफी के टीचर धर्मपाल जिस्टू, राजनीतिक शास्त्र की टीचर रिनू धीमान, अर्थशास्त्र के टीचर लालचंद चौहान, अंग्रेजी विषय की टीचर मीना मिश्रा को दिया है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता सहित सभी अध्यापकों ने पढ़ाई में प्रोत्साहन दिया। प्रियंका शर्मा का कहना है कि उनका अगला लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में आकर लोगों की सेवा करना है। इसके लिए वह दिनरात मेहनत करेगी।

कभी बेटे की कमी महसूस नहीं हुई
जगदीश दत्त शर्मा व गीता शर्मा के घर चारों ही औलाद बेटियां हुई हैं। प्रियंका की एक बहन ने वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में विज्ञान संकाय में 78 फीसदी अंक हासिल किए हैं। एक अन्य बहन ने भी इसी स्कूल में दसवीं की परीक्षा दी है, जबकि सबसे छोटी बेटी चौथी कक्षा में पढ़ती है।

पेशे से किसान जगदीश दत्त व गृहिणी गीता शर्मा दोनों की स्नातक है। जगदीश दत्त शर्मा ने कहा उन्हें अपनी बेटियों की सफलता पर गर्व है। उन्होंने कहा कि बेटी की कामयाबियों से उन्हें कभी भी बेटे की कमी महसूस नहीं हुई। वह अपनी सभी बेटियों को सफलता के सबसे उंचे मुकाम पर देखना चाहते हैं।