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बलि पर लगा प्रतिबंध तो समाज के सामने खड़ी हो गई समस्या, कैसे निभाएं परंपर

7 वर्ष पहले
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ठियोग। ठियोग कारदार संघ की बैठक प्रधान मदन चौहान की अध्यक्षता में शनिवार को ठियोग के लक्ष्मीनारायण मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय की ओर से देव मंदिरों में बलि पर प्रतिबंध लगाने सहित देव समाज की कई समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में ठियोग क्षेत्र के तहत आने वाली विभिन्न देवी और देवताओं के कई प्रमुख कारदारों के अलावा देव समाज में मान्य प्राचीन रियासतों के प्रतिनिधियों के संघ से भी कुछ ने शिरकत की।

सभी को हो स्वतत्रंता

इस मौके पर संघ ने कहा कि जहां पर बलि नहीं दी जाती है उन्हें इसके लिए बाध्य करने का कोई इरादा नहीं है लेकिन जिन देवठियों में प्रथा और विधान है उसे भी एकदम से बन्द नहीं किया जा सकता है। बैठक में कारदारों से कहा गया कि वे देवताओं की शरण में जाएं और उनसे ही राय मांगे। इस मौके पर मदन चौहान ने कहा कि कई देव मंदिरों में पूजा के लिए अब मंदिरों की शिखा पर बलि देने और अन्य प्रकारों से खुलेआम बलि की पंरपरा स्वत: ही समाप्त हो गई है लेकिन कुछ पूजा विधियां ऐसी हैं जिनके लिए देवता ही लोगों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देवसमाज का पक्ष भी सुना जाना चाहिए। संघ के महासचिव लायकराम शर्मा ने कहा ब्राह्मण समाज की ओर से की गई टिप्पणी पर कहा कि गौहत्या को लेकर यह समाज क्यों सोया हुआ है। उन्होनें बकरीद और अन्य मौकों पर कटने वाले सैंकड़ों पशुओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि केवल हिंदुओं के पूजा विधानों को ही निशाना नहीं बनाया जा सकता है।

संघ का संविधान बना

इस बैठक के दौरान18 देवठियों के चंवर मुखिया ठाकुर योगेन्द्र चंद की मौजूदगी में कारदार संघ का संविधान भी बनाया गया। जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
प्रथा से बंधा है देव समाज
इस मौके पर अपने संबोधन में प्रधान मदन चौहान ने ठियोग कारदार संघ क पक्ष रखते हुए कहा कि 1960 में बने पशुओं के प्रति हिंसा को लेकर कानून की धारा 28 में साफ लिखा गया है कि यह कानून प्रदेश के उन समुदायों पर लागू नहीं होगा जिनके समुदाय में बलि की प्रथा प्राचीन समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय के निर्णय को लेकर कुल्लू देव समाज के प्रमुख महेश्वर सिंह ने न्यायालय में इस निर्णय को लेकर प्रार्थना पत्र दिया है और ठियोग कारदार संघ भी इस पर निर्णय की प्रतीक्षा करेगा और यदि आवश्यकता पड़ी को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगा।
फोटो- कारदार संघ की बैठक को संबोधित करते प्रधान मदन व कारदार।