आरोपों का सीधा जवाब दें वीरभद्र, मेरे खिलाफ पंत ने नहीं कहा कुछ भी: धूमल

8 वर्ष पहले
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हमीरपुर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता प्रेमकुमार धूमल ने आरोप लगाया है कि भाजपा के तथ्यों पर आधारित आरोपों का सीधा जवाब देने की बजाए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी सरकार बौखला कर जनता व पार्टी हाईकमान को गुमराह करने वाली सूचनाएं दे रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि वरिष्ठ आइएएस अधिकारी केके पंत ने धर्मशाला में विजिलेंस को जो बयान दिया है वह डराने धमकाने की कार्रवाई के जरिए दिलवाया गया है। पंत ने उनके खिलाफ ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जिसका जिक्र मीडिया में हुआ है। वास्तव में पंत की स्टेटमेंट सरकार ने पहले ही तैयार कर रखी थी कि उन्हें जांच में क्या बयान देना है। कहा कि पंत की स्टेटमेंट की प्रति उनके पास मौजूद है।

मंगलवार को यहां मीडिया को संबोंधित करते हुए धूमल ने कहा कि वीरभद्र और सरकार के खिलाफ भाजपा की मुहिम तब तक जारी रहेगी जब तक उन्हें हटाया नहीं जाता। उन्होंने ये भी कहा कि झूठे और गलत बातें कहकर मुख्यमंत्री व उनके मंत्री और विधायक जनता को गुमराह कर रहे हैं। मगर यह कांग्रेस को तय करना है कि उसे अपनी छवि कैसी चाहिए है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि वे बौखलाहट में आकर अनाप-शनाप बयानबाजी और आधारहीन आरोप आखिर क्यों लगा रहे हैं। उन्होंने वीरभद्र को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास एक इंच भी भूमि बेनामी है जिसके वे बार-बार आरोप लगा रहे हैं तो सरकार उसे जब्त करे और यदि ऐसा नहीं है तो गलत आरोपों पर माफी मांगें। धूमल ने कहा कि वीरभद्र की यह आदत ही बन गई है।

स्वयं लाभ उठाने के लिए वे गलत काम करते हैं और जब फंस जाते हैं तो गलती दूसरों के गले डाल देते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उन्होंने सिलसिलेबार आरोप लगाते हुए कहा कि जब 161 बीघा जमीन उनकी माता के निधन के बाद वीरभद्र के नाम हुई तब पकड़े जाने पर वे इसे अधिकारियों की गलती कहकर कानून से अनभिज्ञ बन गए। फिर संपत्ति पर गलत शपथपत्र देकर उस गलती को पावर ऑफ अटार्नी के गलत शपथ पत्र पर दे दिया। तीसरी मर्तबा चुनाव आयोग के सामने शपथपत्र में पूरी जानकारी नहीं दी तो कहा उनसे गलती हो गई और धर्मपत्नी ने सही जानकारी दे दी है। चौथी बार सैकड़ों टन सेब स्कूटर पर ढोने की बात सामने आई तो कहा कि सेब बेच दिया है, ले जाने के बारे में गलती हुई तो ले जाने वाला चुनीलाल जाने। 5वीं बार कृषि आय की रिटर्न गलत भरी तो कहा वकील ने गलती की। पूछा कि क्या सीएम ने उस रिटर्न पर खुद हस्ताक्षर किए थे या वकील ने ही कर दिए थे।