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मैंने मौत को करीब से देखा, अल्लाह! वादी में ऐसे दिन न आएं

7 वर्ष पहले
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{जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ के दौरान इस घर में फंसे थे अब्दुल अजीज (इनसेट में)।}
शिमला। जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ के उस मंजर को याद करके अब्दुल अजीज नींद में भी जाग जाते हैं। सपने में भी वही ख्याल रह रहकर आ रहा है। मौत काे करीब से देखा, पल-पल लग रहा था कि ये सैलाब हम सभी को निगल जाएगा। कारगिल के रहने वाले अब्दुल अजीज पेशे से इंजीनियर हैं। वे कश्मीर में आई बाढ़ के गवाह हैं जिसमें सैकड़ों जान गंवा चुके हैं। रविवार को बच्चों से मिलने शिमला पहुंचे ई. अजीज ने भास्कर से कहा कि वे कारगिल में पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर हैं।

वे चार सितंबर को श्रीनगर सरकारी काम से आए थे। वे जवाहर नगर में ठहरे। सुबह जब बाहर निकले तो देखा की चारों तरफ पानी ही पानी था। लोग चिल्ला रहे थे, कई घरों में पानी भर गया था। लोगों ने कहा कि ये पानी निकल जाएगा। इसीलिए वे भी वहां पर रुक गए। अगले दिन बारिश और तेज हुई और पानी ज्यादा बढ़ने लगा। इस कारण लोगों को जान बचानी मुश्किल हो गई। अब्दुल अजीज का परिवार शिमला में रहता है। उनके बच्चे बीसीएस स्कूल में पढ़ते हैं।

चिल्ला रहे थे लोग

उस मंजर को याद करते हुए अब्दुल अजीज कहते हैं कि जब घर गिरने लगे तो उन्हें लगा कि अब बचना बहुत मुश्किल है। उनकी आंखों के सामने ही लोग नदी में बह रहे थे। वे मकान की सबसे ऊंची मंजिल में खड़े थे। सभी को आशा थी कि कोई न कोई चमत्कार होगा और वे सुरक्षित वहां से निकलेंगे। उनका कहना है कि मकान ताश के पतों की तरह बिखर रहे थे। जिस मकान में वह खुद ठहरें थे, उस मकान की भी दीवार ढहने लगी थी। ऐसे में उन्हें चिंता सताने लगी थी कि उनके बच्चों का उनके बिना क्या होगा।

फौज आई और हमें बचाया

अब्दुल अजीज कहते हैं कि अल्लाह ऐसे दिन फिर कभी न आएं। उन्हें जिस चमत्कार की उम्मीद थी, आखिर वही हुआ। भारतीय फौज उन्हें रेस्क्यू करने के लिए पहुंची। सात सितंबर को उन्हें जवानों ने वहां से सुरक्षित निकाला। उनका कहना है कि कश्मीर के लोगों को पूरे देशवासियों की जरूरत है। लोगों की जानें बचाने के लिए हम सभी को मदद करनी होगी। जवानों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सेना से ही लोगों की आखिर उम्मीद है।
आगे की स्लाइड्स में देखें कश्मीर में आई बाढ़ के और फोटो।