गैस लगने से हुई सुमित्रा की मौत

9 वर्ष पहले
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रामपुर बुशहर।


तकलेच चौकी अंतर्गत बरशोल में कथित मारपीट से हुई सुमित्रा की मौत को लेकर टेकचंद के परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को भी एकतरफा करार देते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा कि क्षेत्र के समस्त लोग जानते हैं कि सुमित्रा की मौत गैस लगने से हुई, लेकिन इस मौत को हत्या से जोड़ा जा रहा है।


सोमवार को एक बयान में टेकचंद के परिजन द्वारका दास, हेमराज, जयप्रकाश, सरिता ने कहा है कि अगर सुमित्रा देवी को अंदरूनी चोटें होती तो वह अपना इलाज अस्पताल में करवा सकती थी और अगर अस्पताल के डॉक्टरों पर विश्वास नहीं था तो अपना जान को जोखिम में न डालकर अन्य कहीं चिकित्सीय इलाज करवा सकती थी। सुमित्रा के साथ कथित मारपीट का मामला झूठा है और घरेलू झगड़े को तिल का ताड़ बनाने की कोशिश की जा रही है। रिश्तेदारों ने कहा कि कथित मारपीट के मामले को भी बेवजह उछाला जा हा है। जिस दिन बरशोल गांव में सुमित्रा व रोशनलाल के साथ मारपीट हुई उससे पहले रोशनलाल व अन्य साथियों ने जवाहरलाल के साथ मारपीट की थी। अगर बीच में राजा राम नहीं आया होता तो जवाहरलाल की जान पर भी बन सकती थी। लेकिन अभी तक ये बात सामने नहीं आ पाई है। हेमराज व सरिता का कहना है कि सुमित्रा की मौत का अफसोस उन्हें भी है, लेकिन जिस तरह से सुमित्रा की मौत को अलग-अलग मोड़ दिए जा रहे है वह गलत है।

पुलिस कर रही मामले की जांच


25 दिसंबर को मारपीट की घटना के बाद सुमित्रा को रामपुर अस्पताल लाया जाता है। जिसके बाद डॉक्टर उसका इलाज करते है। और दो दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। द्वारका दास व जयप्रकाश का कहना है कि अगर सुमित्रा की तबीयत इतनी खराब होती तो अस्पताल प्रबंधन इतनी जल्दी उसे छुट्टी दे ही नहीं सकता था। लेकिन सुमित्रा की हालत को देखते हुए उसे घर भेज दिया गया। 12 दिनों के बाद अगर सुमित्रा अस्पताल आती भी है तो इसके पीछे कारण कुछ और भी रह सकता है। जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। टेकचंद के परिजनों का कहना है कि पुलिस दोनों पक्षों की जांच करें। ताकि सच सभी के सामने आ सके। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस उप अधीक्षक आरपी जसवाल का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर मामला 302 में तबदील हुआ है। अभी फोरेंसिक लैब से रिपोर्ट आना बाकी है।