शिमला। हिमाचल में रेत और बजरी संकट शीघ्र ही खत्म हो सकता है। प्रदेश में खनन लीज की मंजूरी न मिलने के कारण लगातार इसका संकट बढ़ता जा रहा है। राज्य में पांच हेक्टेयर तक खनन लीज के लिए भी ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के बाद रोक लगी है। केंद्र सरकार ने भी इस मसले पर अधिसूचना जारी कर रखी है। राज्य में खनन मंजूरी के लिए बनने वाली कमेटी का कार्यकाल भी मार्च में खत्म हो चुका है। राज्य सरकार ने केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद यह मामला उठाया था। इसके बावजूद राज्य सरकार को कमेटी गठन के लिए हरी झंडी नहीं मिल पा रही थी।
केंद्र ने राज्य को दोबारा कमेटी के सदस्यों के नाम भेजने के लिए कहा है। इससे राज्य में खनन के लिए मंजूरी देने वाली कमेटी के गठन की संभावना बढ़ गई है। राज्य के उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने माना कि यह मामले केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री के समक्ष उठाया था। इस मामले पर केंद्र ने शीघ्र ही कमेटी में शामिल होने वाले अधिकारियों की सूची मांगी है।
क्या है विवाद
हिमाचल में रेत और बजरी के खनन के लिए सरकार आधिकारिक तौर पर लीज नहीं दे पा रही है। केंद्र सरकार ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में अपने जवाब में साफ कहा है कि नदियों के किनारे पांच हेक्टेयर भूमि पर भी खनन की अनुमित देने पर प्रतिबंध है। ऐसे में राज्य सरकार काफी मुश्किल है। बिना खनन लीज के रायल्टी नहीं मिल रही है। वहीं लोगों को भी रेत बजरी के संकट से जूझना पड़ रहा है।
खनन के मामले लटके
हिमाचल के मामलों को निपटाने के लिए केंद्र की ओर से हिमाचल के लिए गठित कमेटी का कार्यकाल 14 मार्च को खत्म हो गया था। इस कारण अभी तक राज्य की ओर से केंद्र के पास भेजे गए खनन के सभी मामले अधर में लटके हैं। नई कमेटी बनने से खनन को मंंजूरी मिल सकेगी।