शिमला। हिमाचल सरकार ने फरवरी आैर मार्च महीने के जरूरी खर्चों के लिए केंद्र से 300 करोेड़ रुपए का कर्ज मांगा था। लेकिन मंजूर हुआ सिर्फ 95 करोड़। ऐसे में राज्य को इन महीनों में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार अभी तक केंद्र से 2200 करोड़ का कर्ज ले चुकी है।
चालू वित्त वर्ष के लिए प्रदेश को केंद्र ने 2700 करोड़ रुपए का कर्ज का कोटा दिया था। उम्मीद थी कि प्रदेश सरकार को 300 करोड़ फरवरी में मिलने के बाद राज्य को खर्च चलाने में काफी राहत मिल सकती है। केंद्र की आेर से सशर्त ऋण में कटौती के साथ मंजूरी देने के बाद सरकार की चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार को हालांकि स्माॅल सेविंग के साथ नाबार्ड से करीब 69 करोड़ रुपए इन दो महीनों में मिलने की उम्मीद है। लेकिन कर्मचारियों के वेतन, पेंशन से लेकर अन्य खर्च को पूरा करना वर्तमान स्थिति में राज्य सरकार के लिए परेशानी बन सकती है।
वेतन-पेंशन के लिए कितने पैसे की जरूरत
दो महीने के खर्च को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को वेतन आैर पेंशन के भुगतान के लिए ही लगभग 1500 करोड़ से ज्यादा की राशि की जरूरत है। इसे देखते हुए सरकार ने आबकारी एवं कराधान विभाग से मिलने वाले राजस्व की अदाएगी में तेजी लाने के निर्देश विभाग को जारी किए हैं।