फोटो- वीरवार को एचपीयू में फीस वृद्धि के विरोध में पिंक पैटल पर प्रदर्शन करते एसएफआई कार्यकर्ता।
शिमला। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के वीसी एडीएन वाजपेयी पर बुधवार को हमले का साइड इफेक्ट अगले ही दिन देखने को मिला। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने वीरवार को वीसी को पदों से त्यागपत्र दे दिए। इसमें कहा है कि यदि वीसी ही सुरक्षित नहीं हैं तो अन्य के क्या हाल होंगे। उन्होंने विवि में ऐसे हालात में काम न करने की बात कही है। वीसी से अधिकारियों ने शिकायत की है कि स्टूडेंट अधिकारियों को धमकियां दे रहे हैं। डर के साए में प्रशासनिक अधिकारी कैसे नौकरी कर सकते हैं। इसलिए सभी ने त्यागपत्र दिए हैं। अभी तक वीसी ने त्यागपत्र स्वीकार नहीं किए हैं। बुधवार को यूनिवर्सिटी में एसएफआई के छात्रों की वीसी से झ़ड़प के बाद परिसर में माहौल गरमा गया है। छात्र संगठन चुनाव करवाने आैर फीस घटाने की मांग कर रहे हैं। सभी छात्र संगठन प्रदेशभर में इसे लेकर आंदोलनरत हैं।
डरे हुए हैं अफसर
एचपीयू के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा ने कहा कि छात्रों की धमकियों से घबराकर प्रशासन के सभी अधिकारियों ने वीसी को त्यागपत्र सौंप दिए हैं। अगर छात्रों को अधिकारियों की जरूरत ही नहीं है तो वे खुद यूनिवर्सिटी चलाएं। वे तब तक अपने पद नहीं संभालेंगे जब तक अधिकारियों को धमकियां देने की कुप्रथा को खत्म नहीं किया जाता है। वीसी पर हमले के आरोप में 10 छात्रों पर केस दर्ज किया है। चार को 27 तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है।
सीएम को दी जानकारी
वीसी ने वीरवार शाम मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात की। उन्होंने बुधवार को खुद पर हुए हमले आैर परिसर में बढ़ रहे तनाव की पूरी स्थिति की सीएम को जानकारी दी। वीरभद्र ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सरकार पूरी तरह से प्रशासन के साथ है।
पुलिस अभिरक्षा में पहुंचे कुलपति
एचपीयू के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी वीरवार को पुलिस प्रोटेक्शन के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे। सुबह दस बजे वे गाड़ी में विश्वविद्यालय पहुंचे। उनकी गाड़ी के आगे पुलिस की पॉयलट कार थी। एचपीयू के मेन गेट से लेकर कुलपति कार्यालय तक पुलिस के दर्जनों जवानों की तैनाती की गई थी। कड़ी सुरक्षा के बीच कुलपति दफ्तर पहुंचे। उनके अंदर जाते ही वीसी ऑफिस के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया। गेट के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर पुलिस का कड़ा पहरा था। कैंपस में हिंसा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस जवानों की तैनाती कर दी गई है। एसएफआई कार्यकर्ता कुलपति कार्यालय की तरफ बढ़ने लगे तो पुलिस बल की एक टुकड़ी सड़क पर खड़ी हो गई तथा उन्होंने विद्यार्थियों को फीस काउंटर के पास रोक दिया। जहां कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया तथा कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसएफआई ने शिक्षा का बहिष्कार किया। सुबह से लेकर कोई भी कक्षाएं नहीं चलने दी। छात्रों ने कैंपस में रैली निकाली और पिंक पैडल चौक पर कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
वर्कर्स न छोड़े तो जेल भरो
एससीए के निवर्तमान सचिव पियुष सहवाल ने आरोप लगाया कि चार छात्रों को बिना किसी कारण गिरफ्तार किया है। वे विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे। मांगाें को उठाना छात्रों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जल्द छोड़ा नहीं गया तो एसएफआई कार्यकर्ता सारी जेलें भरने के लिए तैयार हैं।
न पढ़ाई न हुए प्रेक्टिकल
एचपीयू में न तो कक्षाएं चलने दी और न ही प्रेक्टिकल हुए। छात्र सुबह क्लासेज लगाने के लिए पहुंचे। उन्हें पहले ही कक्षा के बहिष्कार के बारे में बताया गया। कुछ छात्र लाईब्रेरी में चले गए। कई वापस हाॅस्टल लौट गए। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि 25 सितंबर तक कक्षाओं का पूर्णत बहिष्कार रहेगा।
एक दर्जन हो सकते हैं सस्पेंड
एचपीयू कैंपस में हिंसा फैलाने के आरोप में आज िहमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कड़ी कार्रवाई कर सकता है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि आज करीब एक दर्जन आरोपी छात्रों को सस्पेंड किया जा सकता है।
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