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सीपीएस ने अवैध निर्माण कर अपने ही विभाग के नियम तोड़े

7 वर्ष पहले
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शिमला. शहरी विकास विभाग के सीपीएस ही नियमों को ताक में रखकर भवन का निर्माण करवा रहे हैं। सीपीएस इंद्रलखन पाल ने तारादेवी के पास तीन मंजिला स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है। अवैध निर्माण को रोकने के लिए निगम की आर्किटेक्ट डिपार्टमेंट ने स्टॉप वर्क का नोटिस भी सीपीएस को जारी किया है। आम लोगों के अवैध निर्माण पर फटाफट कार्रवाई करने वाले नगर निगम पर अब शहर के पौने दो लाख लोगों की नजरें टिकी हैं कि वह आगे क्या कार्रवाई करता है। सीपीएस खुद निगम को सभी दस्तावेज मुहैया करवाने औैर नोटिस का जवाब देने की बात स्वीकार चुके हैं।

सीपीएस इंद्रदत्त लखनपाल की पत्नी उषा लखनपाल नगर निगम में बालूगंज वार्ड की पार्षद हैं। ऐसे में शहरी विकास विभाग के सीपीएस और निगम की महिला पार्षद की ओर से नियमों को ताक में रखकर भवन का निर्माण किया जाना बड़े सवाल खड़े कर रहा है। नियम बनाने वाले ही नियमों को ताक में रखेंगे तो सरकार की छवि पर विपरीत असर पड़ेगा।

प्रदेश सरकार की ओर से टीसीपी एक्ट में संशोधन किए जाने को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या एक्ट में संशोधन चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ही किया जा रहा है। जब से सरकार की ओर से एक्ट में संशोधन की बात कही गई है तब से राजधानी सहित प्रदेश में भी अवैध निर्माण के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। शहर में कई प्रभावशाली लोगों ने अवैध निर्माण करवा रखा है। रिटेंशन पॉलिसी आने पर ये भवन नियमित हो जाएंगे। कई जगहों पर भारी अवैध निर्माण हो रखा है। नगर निगम की आर्किटेक्टस ब्रांच सिर्फ चिन्हित लोगों पर ही कार्रवाई करता है।

ये हो सकती है कार्रवाई
लखनपाल को निगम प्रशासन की ओर से हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 254 (1) के तहत भवन के निर्माण को रोकने के और भवन के नक्शे की एक कॉपी जमा करवाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस के बावजूद यदि भवन मालिक भवन निर्माण नहीं रोका तो भवन मालिक को हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 253 के तहत आयुक्त कोर्ट में केस लगा दिया।

नगर निगम के आयुक्त कोर्ट में भवन मालिक से भवन के दस्तावेजों की जांच की जाती है। जांच के दौरान यदि भवन नियमों के अनुसार पाया जाता है और 10 फीसदी तक डेविएशन पाई जाती है तो उसे नियमानुसार पेनल्टी लगाई जाती है। इसके अलावा यदि भवन नियमानुसार सही नहीं पाया जाता है तो भवन के अवैध हिस्से को तोड़ने के भी आदेश सुनाया जाता है।